बिहार में 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण, राज्य में दिखेगा आंशिक असर

पटना,

मार्च की शुरुआत आसमान में एक खास खगोलीय घटना के साथ होने जा रही है। 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। हालांकि यह पूरी तरह से हर जगह समान रूप से दिखाई नहीं देगा। बिहार में इसका प्रभाव आंशिक रूप से ही देखने को मिलेगा, लेकिन खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए यह दिन काफी दिलचस्प रहेगा।

मौसम विभाग के अनुसार राज्य में चंद्रमा का उदय शाम लगभग 5:44 बजे के आसपास होगा। उसी समय से ग्रहण का प्रभाव नजर आना शुरू हो जाएगा। देश के कई हिस्सों में ग्रहण दोपहर करीब 3:20 बजे से आरंभ होकर शाम 6:48 बजे तक चलेगा। इस अवधि के बीच मुख्य चरण यानी पूर्ण ग्रहण करीब 4:34 बजे से शुरू होकर 5:33 बजे तक रहेगा।

पटना में चंद्रमा लगभग 5:51 बजे दिखाई देगा, जबकि गया में भी लगभग यही समय रहेगा। भागलपुर में चंद्रमा थोड़ा पहले, करीब 5:44 बजे के आसपास नजर आएगा। यानी जब चंद्रमा बिहार के आसमान में दिखेगा, तब तक ग्रहण का कुछ हिस्सा गुजर चुका होगा, इसलिए यहां पूर्ण नहीं बल्कि आंशिक दृश्य ही दिखाई देगा।

खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब बनता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया से ढक जाता है, जबकि आंशिक ग्रहण में उसका केवल कुछ भाग ही प्रभावित होता है — बिहार में यही स्थिति रहने वाली है।

 

धार्मिक मान्यताएं और सूतक काल

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों से बचने की परंपरा है। कई लोग इस अवधि में पूजा-पाठ, भोजन पकाने और मंदिर प्रवेश से परहेज करते हैं।

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3 मार्च को होली के रंग खेलने से भी लोग परहेज कर सकते हैं, क्योंकि ग्रहण के दिन इसे शुभ नहीं माना जाता। परंपरानुसार ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान करने की मान्यता है और अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगोत्सव मनाना अधिक उचित बताया जा रहा है।

 

लोगों में उत्साह

बिहार के कई शहरों में खगोल प्रेमी इस घटना को देखने की तैयारी कर रहे हैं। वैज्ञानिक इसे एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के कारण आम लोगों में जिज्ञासा और सावधानी दोनों देखने को मिलती है। साफ मौसम रहा तो शाम को आसमान में बदलते चंद्रमा का दृश्य देखने लायक होगा।

खगोलीय घटनाएं जहां विज्ञान की रोचक झलक दिखाती हैं, वहीं परंपराएं समाज की आस्था को भी सामने लाती हैं — 3 मार्च का चंद्र ग्रहण इसी मेल का एक सुंदर उदाहरण बनने वाला है।

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