मेकेदातु परियोजना और मछुआरों के मुद्दे पर केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बाद अब राज्य के एक और प्रमुख नेता और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार के सामने कई अहम मुद्दे उठाए हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना, श्रीलंका द्वारा गिरफ्तार किए गए तमिल मछुआरों की रिहाई, और तमिल सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात राजधानी दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ परिसर में हुई, जिसे तमिलनाडु की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक के दौरान विजय ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को तब तक मंजूरी न दी जाए, जब तक कावेरी बेसिन से जुड़े सभी राज्यों की सहमति प्राप्त न हो जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना तमिलनाडु के किसानों और जल संसाधनों पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। विजय ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय बताया।

उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को निर्देश दिए जाएं कि वे तमिलनाडु, केरल और पुुदुचेरी की सहमति के बिना किसी प्रकार की अंतिम मंजूरी जारी न करें। विजय ने यह भी कहा कि कावेरी जल विवाद पहले ही लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है और ऐसे में किसी भी एकतरफा फैसले से राज्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

बैठक में श्रीलंका द्वारा गिरफ्तार किए गए तमिल मछुआरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विजय ने प्रधानमंत्री से अपील की कि केंद्र सरकार राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप करे ताकि भारतीय मछुआरों की जल्द रिहाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि समुद्र में मछली पकड़ने वाले तमिल मछुआरे अक्सर सीमा विवाद और सुरक्षा कारणों से गिरफ्तार कर लिए जाते हैं, जिससे उनके परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में आ जाते हैं।

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विजय ने यह भी कहा कि केवल मछुआरों की रिहाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी जब्त की गई नौकाओं को वापस दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान तलाशना भी जरूरी है। उन्होंने केंद्र से श्रीलंका सरकार के साथ लगातार संवाद बनाए रखने का आग्रह किया।

सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा करते हुए विजय ने तमिल परंपराओं और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों को भी प्रधानमंत्री के सामने रखा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत लंबे समय से “तमिल थाई वाझ्थु” से होती रही है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल के कुछ प्रशासनिक निर्देशों के बाद इस पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विजय ने केंद्र सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की ताकि राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान बना रहे।

इसके अलावा उन्होंने तमिलनाडु में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग भी रखी। विजय ने कहा कि राज्य में सड़क, बंदरगाह, रेलवे, औद्योगिक गलियारे और मेट्रो परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जाना आवश्यक है ताकि रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकें।

उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात कर राज्य के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में कोयंबटूर, मदुरै और होसुर जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। विजय का कहना था कि तमिलनाडु देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसलिए राज्य की विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की यह दिल्ली यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह तमिलनाडु से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखने का प्रयास भी था। खासतौर पर मेकेदातु परियोजना और मछुआरों की गिरफ्तारी जैसे विषय लंबे समय से राज्य की राजनीति और जनता की भावनाओं से जुड़े रहे हैं।

इस मुलाकात के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। तमिलनाडु के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राज्य से जुड़े इन संवेदनशील मामलों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।

Reference The Hindu

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