NFHS-6 रिपोर्ट: भारत में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार, 90% से अधिक बच्चों का जन्म अब अस्पतालों में

नई दिल्ली:

भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के अनुसार, देश में अब अधिकांश बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है। रिपोर्ट बताती है कि करीब 90 प्रतिशत से अधिक प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए, जो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

यह सर्वे वर्ष 2023-24 के दौरान किया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों में कुपोषण, गंभीर कमजोरी और कई स्वास्थ्य समस्याओं में कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं, टीकाकरण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से यह बदलाव संभव हो पाया है।

 

अस्पतालों में प्रसव का बढ़ा प्रतिशत

सर्वे के अनुसार, संस्थागत प्रसव यानी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले जन्मों का प्रतिशत पिछले सर्वे की तुलना में बढ़ा है। पहले यह आंकड़ा लगभग 88 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

ग्रामीण इलाकों में भी महिलाओं का अस्पतालों की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, जननी सुरक्षा जैसी योजनाएं और गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में प्रसव बढ़ने से माताओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में मदद मिली है। सुरक्षित प्रसव के कारण जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।

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बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार

रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी राहत भरी खबर सामने आई है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ठिगनापन (Stunting) और गंभीर दुबलापन (Severe Wasting) पहले की तुलना में कम हुआ है।

. बच्चों में स्टंटिंग का स्तर घटा है

. गंभीर कमजोरी के मामलों में कमी दर्ज हुई

. कम वजन वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट आई

हालांकि विशेषज्ञों ने कहा कि अभी भी कुपोषण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कई राज्यों में यह चुनौती बनी हुई है। इसके लिए पोषण योजनाओं को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

 

टीकाकरण अभियान का असर

देश में टीकाकरण कवरेज में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। 12 से 23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत पहले से अधिक दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश बच्चों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से वैक्सीन उपलब्ध कराई गई। खासतौर पर रोटावायरस और खसरा टीकाकरण में तेज वृद्धि देखी गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद भी भारत ने टीकाकरण अभियान को मजबूती से जारी रखा, जिससे बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिली।

 

गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं

सर्वे में यह भी सामने आया कि अब अधिक महिलाएं गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करा रही हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने बताया कि उन्हें एंटिनेटल केयर (ANC) सेवाएं मिलीं।

. पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी

. चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी बढ़ा

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. आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेने वाली महिलाओं की संख्या में सुधार हुआ

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान सही पोषण और समय पर जांच से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है

 

महिलाओं में जागरूकता और डिजिटल पहुंच बढ़ी

रिपोर्ट में महिलाओं की आर्थिक और डिजिटल भागीदारी को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।

.मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी

. इंटरनेट उपयोग में तेजी आई

. बैंक खाते स्वयं संचालित करने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी बढ़ा

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल पहुंच बढ़ने से महिलाओं को स्वास्थ्य योजनाओं, पोषण और सरकारी सेवाओं की जानकारी आसानी से मिल रही है।

 

चुनौतियां अभी भी बाकी

हालांकि रिपोर्ट ने कई क्षेत्रों में प्रगति दिखाई है, लेकिन कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। गैर-संचारी रोगों, मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता दिखाई दिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत को पोषण के साथ-साथ जीवनशैली संबंधी बीमारियों पर भी ध्यान देना होगा।

इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर को कम करना भी जरूरी माना गया है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

NFHS-6 की यह रिपोर्ट भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार यह दिखाता है कि जागरूकता, सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

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Reference The Hindu

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