News Desk: पटना में आज बिहार की राजनीति का एक बड़ा अध्याय लिखा गया, जब Gandhi Maidan में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बीच मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। एनडीए सरकार के इस बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों को मिलाकर बिहार मंत्रिमंडल में अब कुल 35 मंत्रियों की व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें फिलहाल एक सीट खाली रखी गई है।
समारोह राजनीतिक रूप से भी बेहद खास रहा क्योंकि इसमें Narendra Modi, Amit Shah समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे। पटना के गांधी मैदान में हजारों समर्थकों की मौजूदगी के बीच शपथ ग्रहण समारोह शक्ति प्रदर्शन में बदलता नजर आया।
नई सरकार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर गठबंधन के भीतर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दी। बीजेपी कोटे से 15 और जेडीयू कोटे से 13 नेताओं को मंत्री बनाया गया, जबकि बाकी सीटें सहयोगी दलों के नेताओं को मिलीं।
शपथ लेने वालों में श्रवण कुमार, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल, लेशी सिंह, रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, अशोक चौधरी, संतोष कुमार सुमन, श्रेयसी सिंह, जमा खान, नंदकिशोर राम, श्वेता गुप्ता समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे। इस विस्तार में पुराने अनुभव और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिला।
इस पूरे विस्तार का सबसे चर्चित नाम रहा Nishant Kumar, जिन्होंने पहली बार मंत्री पद की शपथ ली। बिहार की राजनीति में उनकी एंट्री को जेडीयू की नई पीढ़ी के नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले वर्षों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
महिला नेतृत्व को भी इस बार मजबूत प्रतिनिधित्व मिला। श्वेता गुप्ता को पहली बार मंत्री बनाया गया, जबकि लेशी सिंह और श्रेयसी सिंह जैसे चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई। इसे महिला नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
वहीं पश्चिम चंपारण के रामनगर-2 क्षेत्र से विधायक नंदकिशोर राम के मंत्री बनने के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया। क्षेत्र में जश्न का माहौल है और स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे इलाके के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी का यह मंत्रिमंडल सिर्फ प्रशासनिक विस्तार नहीं बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया सामाजिक और राजनीतिक समीकरण है। पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की स्पष्ट कोशिश इस कैबिनेट में दिखाई दे रही है।
बिहार की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि पहली बार बीजेपी के नेतृत्व में राज्य की सत्ता इतनी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सम्राट चौधरी की यह टीम बिहार के विकास, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कितना असर छोड़ पाती है। फिलहाल इतना तय है कि बिहार कैबिनेट विस्तार 2026 ने राज्य की राजनीति में नई बहस और नई दिशा दोनों तय कर दी है।