देश और दुनिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर दिखाई देने लगा है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चीजें लगातार महंगी हो रही हैं, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का बजट बिगड़ता जा रहा है। दूध, खाने-पीने का सामान, एयर कंडीशनर, पेंट, सोना और बाहर खाना खाने जैसी कई चीजों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
मुंबई सहित देश के कई बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को अब हर छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कंपनियों ने कच्चे माल, ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने का हवाला देते हुए अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। यही वजह है कि बाजार में लगभग हर सेक्टर में कीमतें ऊपर जाती दिखाई दे रही हैं।
दूध और खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर सीधे हर घर की रसोई पर पड़ रहा है। दूध के साथ-साथ दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा होने लगा है। कंपनियों का कहना है कि पशुओं के चारे, पैकेजिंग और ईंधन की लागत बढ़ने के कारण उन्हें दाम बढ़ाने पड़े।
रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी सेक्टर में भी खर्च बढ़ गया है। घर से बाहर खाना खाना अब पहले की तुलना में ज्यादा महंगा पड़ रहा है। छोटे ढाबों से लेकर बड़े रेस्तरां तक कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं।
एफएमसीजी कंपनियों ने भी बढ़ाए दाम
घरेलू इस्तेमाल के सामान बनाने वाली बड़ी कंपनियां भी लागत बढ़ने के दबाव में हैं। साबुन, डिटर्जेंट, तेल, पैकेज्ड फूड और पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जा रही है। कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन प्रभावित होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में और भी प्राइस हाइक देखने को मिल सकती है। खासतौर पर अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो परिवहन खर्च और महंगा होगा, जिसका असर हर उत्पाद पर पड़ेगा।
एयर कंडीशनर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर दबाव
गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर की मांग बढ़ने के बीच कंपनियों ने कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। कॉपर और अन्य धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद महंगे हो रहे हैं। कई कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि यदि लागत और बढ़ी तो अगले कुछ महीनों में एसी, फ्रिज और अन्य उपकरणों के दाम फिर बढ़ सकते हैं।
उद्योग जगत का कहना है कि वैश्विक तनाव का असर केवल आयात पर नहीं बल्कि घरेलू उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इससे कंपनियों के लिए कीमतें नियंत्रित रखना मुश्किल होता जा रहा है।
पेंट और निर्माण सामग्री के दाम भी बढ़े
पेंट कंपनियों ने भी अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया है। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्रियां महंगी हो चुकी हैं। इसका असर घर बनाने और रेनोवेशन के खर्च पर भी दिखाई देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो रियल एस्टेट सेक्टर में भी लागत बढ़ सकती है।
सोने की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बीच लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इसका असर शादी-ब्याह और त्योहारों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है। आम परिवारों के लिए गोल्ड ज्वेलरी खरीदना और मुश्किल हो सकता है।
मध्यम वर्ग की बढ़ी परेशानी
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। जहां एक ओर सैलरी में सीमित बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर हर महीने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। बिजली बिल, किराना, यात्रा और बच्चों की पढ़ाई तक का खर्च बढ़ने से परिवारों को बजट संभालना कठिन हो रहा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए तो उपभोक्ताओं का खर्च कम हो सकता है। लोग गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी टाल सकते हैं, जिससे बाजार की मांग पर असर पड़ेगा।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई दर और बढ़ सकती है। खासतौर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने पर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत और बढ़ेगी। इसका असर हर सेक्टर में देखने को मिलेगा।
हालांकि सरकार और कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन आम लोगों के लिए फिलहाल राहत के संकेत कम दिखाई दे रहे हैं। यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो रोजमर्रा की जिंदगी और महंगी हो सकती है।
Reference The Time of India