मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा

मुंबई

देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार को पेश किया है। यह नई तकनीक वाहन मालिकों को पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर वाहन चलाने की सुविधा प्रदान करेगी। कंपनी का मानना है कि यह पहल न केवल ईंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मारुति सुजुकी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को शामिल किया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वाहन E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर आसानी से संचालित हो सकता है। इससे उपभोक्ताओं को ईंधन के चयन में अधिक विकल्प और लचीलापन मिलेगा।

 

क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ऐसे इंजनों पर आधारित होती है जो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रणों पर बिना किसी अतिरिक्त बदलाव के चल सकते हैं। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग बढ़ता है तो इससे पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम होगी और देश को विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

 

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

कंपनी के अनुसार, एथेनॉल की मांग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। गन्ना और अन्य एथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने वाली फसलों की खपत बढ़ने से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।

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मारुति सुजुकी ने कहा कि वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों के विकास में कंपनी पहले से सक्रिय रही है। देश में सीएनजी और एलपीजी वाहनों को लोकप्रिय बनाने में भी कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के जरिए कंपनी स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना चाहती है।

 

कच्चे तेल के आयात में कमी की उम्मीद

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर कहा कि भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल जैसे जैव ईंधन इस निर्भरता को कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

गडकरी ने लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की वकालत की है। उनका मानना है कि जैव ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और आयातित तेल पर खर्च होने वाली भारी राशि को कम करने में मदद करेगी।

 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं। एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से प्रदूषण में कमी आ सकती है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। ऐसे समय में जब दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन पर जोर दिया जा रहा है, भारत में इस तकनीक का आगमन महत्वपूर्ण माना जा रहा है

 

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है तो यह भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़ा बदलाव ला सकता है। सरकार भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत प्रयास कर रही है। ऐसे में मारुति सुजुकी की यह पहल देश में हरित और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का यह नया अध्याय न केवल वाहन उद्योग के लिए बल्कि किसानों, उपभोक्ताओं और देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक अवसर लेकर आया है। आने वाले वर्षों में इस तकनीक का प्रभाव भारतीय सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

Reference The Hindu

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