निर्माण सामग्री महंगी: बढ़ती कीमतों ने रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार धीमी की

पटना |

देशभर में निर्माण सामग्री की लगातार बढ़ती कीमतों ने अब रियल एस्टेट सेक्टर की गति पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में सीमेंट, सरिया, टाइल्स, संगमरमर और अन्य जरूरी सामग्रियों के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे बिल्डरों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने की स्थिति बन रही है।

 

निर्माण लागत में लगातार उछाल

विशेषज्ञों के अनुसार, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की कुल लागत में करीब 5% से 6% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, टाइल्स, ग्रेनाइट और संगमरमर जैसे सजावटी सामग्रियों की कीमतों में लगभग 20% तक का इजाफा हुआ है।

इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो घर बनाने या खरीदने की योजना बना रहे हैं। बढ़ती लागत के कारण कई प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन भी आगे खिसक रही है।

 

सीमेंट और सरिया ने बढ़ाई परेशानी

निर्माण कार्य में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले सीमेंट और सरिया की कीमतों में भी तेज वृद्धि देखी गई है।

फरवरी में सरिया जहां करीब 50 रुपये प्रति किलो था, वहीं अब यह बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो हो गया है।

ब्रांडेड सरिया की कीमत 62-63 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 67-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

सीमेंट के दामों में भी प्रति बोरी 5 रुपये से ज्यादा का उछाल आया है।

इस बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए घर बनाना और भी महंगा कर दिया है।

 

निर्माण कार्य पर ब्रेक लगने की स्थिति

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बढ़ती लागत के कारण कई लोग अपने निर्माण कार्य को फिलहाल टाल रहे हैं। बिल्डर्स का कहना है कि लगातार महंगे होते कच्चे माल के कारण प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना चुनौती बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो निर्माण लागत में 80 से 90 रुपये प्रति वर्ग फीट तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।

 

वैश्विक कारणों का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और अन्य संसाधनों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर निर्माण सामग्री पर भी पड़ रहा है।

पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होने से पेंट और अन्य केमिकल आधारित उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं।

डीजल महंगा होने से परिवहन लागत में इजाफा हुआ है, जिससे ईंट, मिट्टी और अन्य सामग्रियां भी महंगी हो गई हैं।

 

टाइल्स और मार्बल भी हुए महंगे

टाइल्स की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।

एक पेटी टाइल्स पर 50 से 100 रुपये तक का इजाफा हुआ है।

मार्बल और ग्रेनाइट की लागत में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इंटीरियर का खर्च बढ़ गया है।

 

आम लोगों पर सीधा असर

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। जो लोग अपने सपनों का घर बनाने की तैयारी में थे, उन्हें अब बजट दोबारा तय करना पड़ रहा है।

एक सिविल इंजीनियर के अनुसार, 1000 वर्ग फीट के मकान के निर्माण में 10-15 टन सरिया और 400-500 बोरी सीमेंट की जरूरत होती है। ऐसे में थोड़ी सी कीमत वृद्धि भी कुल बजट को काफी बढ़ा देती है।

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 क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?

बाजार के जानकारों का मानना है कि निकट भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रहती है।

 

निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें न सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन गई हैं। अगर जल्द ही कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में घर बनाना और खरीदना और भी मुश्किल हो सकता है।

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