भारत में बनेगा दुनिया की सबसे ऊँचाई तक उड़ने वाला हेलिकॉप्टर

भारत अब एविएशन सेक्टर में एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। देश में जल्द ही ऐसा हेलिकॉप्टर बनाया जाएगा जो दुनिया की सबसे ऊँची चोटियों तक उड़ान भर सकेगा। इसके लिए भारत की टाटा समूह कंपनी और यूरोप की एयरबस कंपनी के बीच समझौता हुआ है। दोनों मिलकर गुजरात के वडोदरा स्थित संयंत्र में उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर का निर्माण शुरू करेंगे।

यह वही श्रेणी का हेलिकॉप्टर होगा जो अत्यधिक ऊँचाई वाले इलाकों — जैसे हिमालयी क्षेत्र — में सुरक्षित उड़ान भरने में सक्षम माना जाता है। बताया जा रहा है कि यह मॉडल माउंट एवरेस्ट जैसी ऊँचाई तक संचालन करने की क्षमता रखेगा, इसलिए इसे विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों और कठिन मौसम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

 

दो तरह के मॉडल तैयार होंगे

निर्माण इकाई में हेलिकॉप्टर के नागरिक (सिविल) और सैन्य — दोनों प्रकार के संस्करण बनाए जाएंगे।

नागरिक मॉडल का उपयोग आपदा राहत, मेडिकल इमरजेंसी, पर्यटन और दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन के लिए होगा।

सैन्य मॉडल सेना के जवानों और सामान की आवाजाही, निगरानी और सामरिक अभियानों में काम आएगा।

इससे सीमा और ऊँचाई वाले इलाकों में सैनिकों तक जरूरी सामग्री पहुँचाना पहले से आसान हो जाएगा।

 

पहाड़ी राज्यों को होगा सबसे बड़ा फायदा

यह हेलिकॉप्टर खासकर लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बहुत उपयोगी माना जा रहा है। जहाँ सड़क संपर्क कठिन है, वहाँ लोगों की आवाजाही, बचाव कार्य और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो सकेगी। आपदा के समय राहत कार्य तेज होने की उम्मीद है।

See also  माघ मेले में उमड़ा आस्था का महासागर, पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में डूबा प्रयागराज

 

उत्पादन और क्षमता से जुड़ी अहम बातें

हेलिकॉप्टर एक बार में लगभग छह यात्रियों को ले जा सकेगा (पायलट के अलावा)।

करीब 662 किलोमीटर तक बिना रुके उड़ान भरने की क्षमता होगी।

इसकी अधिकतम गति लगभग 250 किमी प्रति घंटा तक बताई जा रही है।

शुरुआती वर्षों में नागरिक उपयोग पर ज्यादा ध्यान रहेगा, बाद में सैन्य जरूरत के अनुसार उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट

इस परियोजना से भारत में ही हेलिकॉप्टर निर्माण की तकनीक विकसित होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।

सरकार की “मेक इन इंडिया” पहल के तहत यह कदम रक्षा और नागरिक उड्डयन — दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।

Related Posts

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं…

Read more

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर परिसीमन (Delimitation) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया बयान ने इस…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत