चेन्नई
भारत में जनसंख्या से जुड़े हालिया आंकड़ों ने नई चिंता पैदा कर दी है। केंद्र सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देश में जन्म दर लगातार घट रही है, जबकि मृत्यु दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, आर्थिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां इसके बड़े कारण हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश की कुल जन्म दर में लगातार कमी देखी गई है। 2014 में प्रति हजार आबादी पर जन्म दर 21 थी, जो 2024 में घटकर 18.3 रह गई। वहीं मृत्यु दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2014 में प्रति हजार आबादी पर मृत्यु दर 6.7 थी, जो अब बढ़कर 6.4 से अधिक के स्तर पर बनी हुई है। हालांकि शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन कुल जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण इलाकों में जन्म दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में अब भी अधिक है, लेकिन वहां भी गिरावट तेजी से हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। दूसरी ओर शहरों में बढ़ती महंगाई, करियर पर फोकस और छोटे परिवार की सोच ने जन्म दर को प्रभावित किया है।
सर्वे के आंकड़ों में राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। बिहार देश का सबसे अधिक जन्म दर वाला राज्य बना हुआ है। यहां प्रति हजार आबादी पर जन्म दर करीब 27 दर्ज की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश और झारखंड का स्थान रहा। दूसरी ओर दिल्ली, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जन्म दर काफी कम पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा स्तर और आर्थिक स्थिति का जनसंख्या वृद्धि पर सीधा असर पड़ता है।
मृत्यु दर के मामले में भी कुछ राज्यों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली रही। रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्ग आबादी बढ़ने और कई बीमारियों के कारण कुछ राज्यों में मृत्यु दर में इजाफा देखा गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को वृद्ध आबादी की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार होना होगा।
रिपोर्ट में शिशु मृत्यु दर को लेकर कुछ राहत भरी खबर भी सामने आई है। देश में नवजात और बच्चों की मौत के मामलों में पहले की तुलना में कमी दर्ज की गई है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं, टीकाकरण अभियान और अस्पतालों तक बेहतर पहुंच को इसका प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।
जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां आबादी की वृद्धि धीरे-धीरे स्थिर हो सकती है। लेकिन इसके साथ ही कामकाजी उम्र की आबादी, रोजगार और बुजुर्गों की देखभाल जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जाएंगे। यदि सरकार समय रहते स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर ध्यान देती है, तो यह बदलाव देश के लिए अवसर भी बन सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि घटती जन्म दर का असर आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और श्रम शक्ति पर पड़ सकता है। कई विकसित देशों की तरह भारत को भी भविष्य में वृद्ध जनसंख्या और कम युवा आबादी की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अभी से दीर्घकालिक नीतियां तैयार करने की जरूरत है।
कुल मिलाकर SRS 2024 की रिपोर्ट भारत की बदलती जनसंख्या संरचना की ओर इशारा करती है। जन्म दर में गिरावट और मृत्यु दर में बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में सामाजिक और आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सरकार और समाज दोनों को मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसंख्या संतुलन पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता होगी।
Reference The Hindu