
पटना :
शहर में इन दिनों शादी-विवाह का सीजन चल रहा है, लेकिन इस बार खुशियों के साथ खर्च का बोझ भी बढ़ गया है। रसोई गैस की कमी और महंगाई के असर ने शादी समारोहों को सीधे प्रभावित किया है। हालात ऐसे हैं कि जहां पहले भरपूर व्यंजन परोसे जाते थे, अब वहीं मेन्यू छोटा किया जा रहा है।
गैस की किल्लत से बढ़ा खर्च
शहर में एलपीजी गैस की उपलब्धता कम होने के कारण कैटरिंग सेवाओं की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर शादी आयोजनों पर पड़ा है। कैटरर्स के अनुसार, खाना बनाने की लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे कुल बजट भी बढ़ गया है।
थाली महंगी, मेन्यू सीमित
अब शादी समारोहों में पहले की तरह दर्जनों व्यंजन नहीं दिखते। जहां पहले 20 से ज्यादा आइटम होते थे, अब उन्हें घटाकर 10-12 तक सीमित किया जा रहा है। मिठाइयों और स्पेशल डिशेज़ में भी कटौती की जा रही है, ताकि खर्च को नियंत्रित किया जा सके।
मेहमानों के लिए बदला अनुभव
शादी में आने वाले मेहमानों को भी इस बदलाव का एहसास हो रहा है। पहले जहां बड़े-बड़े काउंटर और विविध व्यंजन आकर्षण का केंद्र होते थे, अब साधारण व्यवस्था देखने को मिल रही है। इससे आयोजकों को बजट संभालने में मदद मिल रही है, लेकिन मेहमानों का अनुभव थोड़ा प्रभावित हुआ है।
शादी का बजट बढ़ा, परिवारों पर दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीजन में शादी का कुल खर्च 1 से 1.5 लाख रुपये तक बढ़ गया है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ चिंता का कारण बन रहा है। कई परिवार अब सादगी से शादी करने या खर्च कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं।
मुहूर्त ज्यादा, मांग भी बढ़ी
इस शादी सीजन में अप्रैल से जुलाई के बीच कई शुभ तिथियां हैं, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित हो रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण गैस, कैटरिंग और अन्य सेवाओं की कीमतों में तेजी आई है।
आयोजकों के सामने नई चुनौती
कैटरर्स और इवेंट मैनेजर्स का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जिससे लागत और बढ़ जाती है। साथ ही, समय पर सेवाएं देना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पटना में इस बार शादी का माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। महंगाई और गैस संकट ने जहां एक ओर आयोजकों की योजना पर असर डाला है, वहीं दूसरी ओर मेहमानों के अनुभव को भी बदल दिया है। अब शादियों में दिखावे की बजाय सादगी की झलक ज्यादा देखने को मिल रही है।





