ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए कवि वैरामुथु, तमिल साहित्य को मिला बड़ा गौरव

चेन्नई:

प्रसिद्ध तमिल कवि, गीतकार और लेखक वैरामुथु को भारत के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि के साथ वे ज्ञानपीठ पाने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार बन गए हैं। खास बात यह है कि लगभग 24 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी तमिल लेखक को यह सम्मान मिला है, जिससे पूरे तमिल साहित्य जगत में खुशी और गर्व का माहौल है।

वैरामुथु लंबे समय से तमिल साहित्य और सिनेमा दोनों क्षेत्रों में अपने लेखन के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताओं और गीतों में समाज, संस्कृति और मानवीय भावनाओं का गहरा चित्रण देखने को मिलता है। उनकी प्रसिद्ध कृति “कल्लिकट्टु इथिहासम” के लिए उन्हें वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने वैरामुथु को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे पहले केवल दो तमिल साहित्यकार — अकिलन और जयकांतन — को ही ज्ञानपीठ सम्मान मिला था। अब वैरामुथु भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि शनिवार सुबह उनकी वैरामुथु से मुलाकात हुई थी और उसी दौरान उन्हें इस सम्मान की खबर मिली, जिसने उस मुलाकात की खुशी को और बढ़ा दिया।

मुख्यमंत्री ने वैरामुथु के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की तमिल कविता में उत्कृष्ट योगदान दिया है। उनके शब्दों में, वैरामुथु ने तमिल साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर वैरामुथु ने भी अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारतीय साहित्य में एक विशेष स्थान रखता है और इसे अक्सर भारतीय साहित्य का “नोबेल पुरस्कार” माना जाता है। उनके अनुसार, तमिल भाषा और उसकी काव्य परंपरा को इस सम्मान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।

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वैरामुथु ने भावुक शब्दों में कहा कि लंबे समय से यह कहा जाता रहा कि तमिल कविता को ज्ञानपीठ सम्मान कम मिला है, लेकिन अब इस धारणा को समाप्त करने का अवसर उन्हें मिला है। उन्होंने इसे तमिल भाषा और उसके साहित्यकारों के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया।

साहित्यिक जगत में वैरामुथु का नाम एक ऐसे लेखक के रूप में लिया जाता है जिन्होंने अपने लेखन से समाज की भावनाओं, संघर्षों और उम्मीदों को शब्द दिए। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होना उनके लंबे साहित्यिक सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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