170 दिनों बाद सोनम वांगचुक की रिहाई, NSA के तहत हिरासत खत्म

नई दिल्ली/लद्दाख:

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षक सोनम वांगचुक को लगभग 170 दिनों की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निरोध आदेश को वापस ले लिया, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से शनिवार को रिहा किया गया। गृह मंत्रालय ने पहले जारी किए गए आदेश को रद्द करते हुए उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला लिया। इससे पहले उन्हें लगभग छह महीने तक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में रखा गया था।

 

अदालत में सुनवाई से पहले आया फैसला

वांगचुक की रिहाई ऐसे समय में हुई है जब उनकी पत्नी ने अदालत में उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस याचिका पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी। माना जा रहा है कि इसी कानूनी प्रक्रिया से पहले सरकार ने हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया।

 

सितंबर से हिरासत में थे वांगचुक

जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक को सितंबर 2025 में हिरासत में लिया गया था। उस समय उन पर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत 170 दिनों की निरोध अवधि लागू कर दी थी।

 

NSA क्या है?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के अंतर्गत प्रशासन को यह अधिकार मिलता है कि वह किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक निश्चित अवधि तक हिरासत में रख सकता है। इसका उपयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब प्रशासन को लगता है कि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

See also  UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद बीजेपी का बयान

 

लद्दाख में आंदोलन की पृष्ठभूमि

सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने क्षेत्र से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों की मांग को लेकर कई अभियानों और शांतिपूर्ण आंदोलनों में भाग लिया था।

उनकी हिरासत को लेकर लद्दाख और करगिल के कई सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की थी। वहीं, नागरिक समाज के कुछ समूहों ने भी इस मामले में पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई थी।

 

समर्थकों में खुशी

रिहाई की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों और सामाजिक संगठनों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई लोगों का कहना है कि वांगचुक की रिहाई से लद्दाख के सामाजिक आंदोलनों को नई ऊर्जा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वांगचुक फिर से पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

 

आगे की राह

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि रिहाई के बाद वांगचुक आगे कौन-सा कदम उठाएंगे, लेकिन उनके समर्थकों को उम्मीद है कि वे लद्दाख के विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने अभियानों को आगे बढ़ाएंगे।

Related Posts

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं…

Read more

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर परिसीमन (Delimitation) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया बयान ने इस…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत