नई दिल्ली: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को चार नई परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी। इन योजनाओं पर कुल ₹4,594 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह कदम देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योग के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि इन चार इकाइयों में से दो ओडिशा, एक पंजाब और एक आंध्र प्रदेश में स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से देश में उच्च गुणवत्ता वाले सेमीकंडक्टर निर्माण की क्षमता बढ़ेगी और रक्षा, अंतरिक्ष, रेलवे और दूरसंचार सहित कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
सिलिकॉन कार्बाइड प्लांट – भुवनेश्वर, ओडिशा

भुवनेश्वर में SiCSem प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सिलिकॉन कार्बाइड आधारित सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में ₹2,066 करोड़ रुपये का निवेश होगा। संयंत्र की वार्षिक क्षमता 60,000 वेफ़र और 96 मिलियन यूनिट ATMP (असेंबली, टेस्ट, मार्क और पैक) होगी।
सिलिकॉन कार्बाइड को एक मजबूत और टिकाऊ सामग्री माना जाता है, जो उच्च तापमान पर भी काम कर सकती है। इसका उपयोग मिसाइल, उपग्रह, रॉकेट, रेलवे इंजन और टेलीकॉम टावर जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।
हेटेरोजेनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस – भुवनेश्वर, ओडिशा
दूसरी परियोजना भी भुवनेश्वर में स्थापित की जाएगी, जिसे HIPSPL नामक कंपनी संचालित करेगी। इस पर ₹1,943 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इकाई में ग्लास पैनल निर्माण (70,000 यूनिट/वर्ष), ATMP (50 मिलियन यूनिट/वर्ष) और 3DHI मॉड्यूल उत्पादन (13,000 यूनिट/वर्ष) की क्षमता होगी।
कॉन्टिनेंटल डिवाइस इंडिया – मोहाली, पंजाब
पंजाब के मोहाली में CDIL द्वारा स्थापित की जाने वाली सेमीकंडक्टर इकाई पर ₹117 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इसकी उत्पादन क्षमता 158 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष होगी। यह इकाई विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स और डिवाइस के निर्माण में योगदान देगी।
एडवांस्ड सिस्टम इन पैकेज टेक्नोलॉजीज – आंध्र प्रदेश
चौथी इकाई आंध्र प्रदेश में ASIP द्वारा स्थापित की जाएगी, जिस पर ₹468 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यहां 96 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष की ATMP क्षमता उपलब्ध होगी।
सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगी गति
मंत्री वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं से भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा मिलेगी। इनसे स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर की मांग में तेजी से वृद्धि होगी। इन चार परियोजनाओं से न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

















