भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बदलती भूमिका और बढ़ते प्रभाव को मजबूती से सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज का भारत केवल अपने राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक विकास, साझेदारी और संकट के समय सहायता प्रदान करने वाले एक भरोसेमंद देश के रूप में उभर रहा है।
डॉ. जयशंकर ने यह बातें सूरीनाम की राजधानी पैरामारिबो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहीं, जहां उन्होंने “पार्टनरशिप फॉर प्रोग्रेस” विषय पर अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की विदेश नीति, वैश्विक सहयोग और मानवीय दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की।
विदेश मंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के कई देशों के साथ विकास आधारित रिश्तों को नई दिशा दी है। चाहे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो, डिजिटल तकनीक में सहयोग हो या फिर शिक्षा और बुनियादी ढांचे का निर्माण, भारत लगातार साझेदार देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सोच केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा प्रगति और स्थायी विकास पर आधारित है।
उन्होंने भारत की “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” यानी संकट के समय सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देश की छवि का भी उल्लेख किया। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और वैश्विक संकटों के दौरान भारत ने कई देशों को दवाइयां, खाद्य सामग्री और जरूरी सहायता उपलब्ध कराई। विदेश मंत्री ने कहा कि यह भारत की जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को दर्शाता है।
डॉ. जयशंकर ने वैश्विक कार्यबल में भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय पेशेवर आज दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भारत की विशेषज्ञता लगातार मजबूत हो रही है। इससे न केवल भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है बल्कि अन्य देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए हैं।
अपने भाषण में उन्होंने भरोसेमंद साझेदारी की अहमियत को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा सहयोगी वही होता है जो अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखे। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है और दुनिया के देशों के साथ समानता एवं सम्मान के आधार पर रिश्ते विकसित कर रहा है।
विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत कई नई वैश्विक पहलों में सक्रिय भूमिका निभाएगा। जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत दुनिया के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। जी-20 की सफल मेजबानी, वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ बढ़ते संबंध और मानवीय सहायता अभियानों ने भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
भारत की विदेश नीति में अब केवल कूटनीतिक बातचीत ही नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सहयोग की भावना भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देख रहे हैं।
Reference Akashvani