न्यूज़ डेस्क पटना : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को एक बार फिर गया की पावन उपनगरी बोधगया पहुंचे। बुद्ध की भूमि ने इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री का चौथी बार स्वागत किया। पिछली बार 5 सितम्बर 2015 को वह प्रधानमंत्री के तौर पर महाबोधि मंदिर आए थे, जहां भगवान बुद्ध को नमन किया था। इस बार उनका दौरा राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा था, जहां उन्होंने करीब 12 हजार करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
विकास की सौगातों का पैकेज
पीएम मोदी ने गयाजी से बिहार को कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। इनमें गया-दिल्ली के बीच अमृत भारत ट्रेन, वैशाली से कोडरमा तक बुद्ध सर्किट की मेमू फास्ट ट्रेन, तथा कई आधारभूत परियोजनाएँ शामिल रहीं। इसके अलावा हृदय योजना के तहत पहले हुए विकास कार्यों का जिक्र भी पीएम मोदी ने किया।

गया की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्षों से उपेक्षित स्थलों को नया रूप दिया है। सीता कुंड, अक्षयवट पिंडवेदी, वैतरणी सरोवर, ब्रह्म सरोवर, गोदावरी और सिंगरा स्थान जैसे धार्मिक स्थलों का सुंदरीकरण कराया गया। वर्ष 2015 से 2019 के बीच लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च कर उपेक्षित स्थलों को चमकाया गया।
पितृपक्ष मेले से पहले विशेष महत्व
गया विश्वभर में अपने पितृपक्ष मेले के लिए प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालु हर साल फल्गु नदी और 54 पिंडवेदियों पर पितरों को तर्पण व पिंडदान करने पहुंचते हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री का बोधगया आगमन एक खास संदेश के रूप में देखा जा रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे सकारात्मक माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस आस्था स्थल को लगातार प्राथमिकता दे रही है।
जनता की उम्मीदें और सवाल
हालांकि कार्यक्रम का भव्य आयोजन और सौगातों की घोषणा के बीच स्थानीय लोगों की अपनी अपेक्षाएँ और सवाल भी हैं। विकास की योजनाएँ कागज पर तो आकर्षक दिखती हैं, लेकिन ज़मीन पर उनका असर कितनी जल्दी और किस स्तर पर होगा, यह चिंता का विषय है।
उदाहरण के तौर पर—
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हृदय योजना के तहत बने कई स्थल आज भी रख-रखाव की कमी से जूझ रहे हैं।
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गयाजी आने वाले पर्यटकों के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएँ अब भी अधूरी बताई जाती हैं।
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स्थानीय व्यापारियों और टूरिज्म सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बावजूद रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के इस दौरे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गयाजी में सौगातों की घोषणा तो बार-बार होती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम आने वाले चुनावों की पृष्ठभूमि में एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है।
समर्थकों का पक्ष
दूसरी ओर बीजेपी और प्रधानमंत्री के समर्थकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर योजनाओं की शुरुआत और धार्मिक स्थलों के सुंदरीकरण का काम पहले कभी नहीं हुआ। उनका मानना है कि गयाजी की पहचान न सिर्फ बिहार में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हो रही है। वंदे भारत ट्रेनों के संचालन और नए रेल संपर्कों से क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
गयाजी की बदलती तस्वीर
सकारात्मक रूप से देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि पिछले एक दशक में गयाजी की तस्वीर बदली है। पहले जो स्थान उपेक्षित और जर्जर थे, वे आज पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं।

















