भारत में महिलाओं और पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति को लेकर किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की प्रारंभिक रिपोर्ट में दक्षिणी राज्यों को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मोटापे के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही सी-सेक्शन (सिजेरियन) से होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत भी राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक पाया गया है।
रिपोर्ट बताती है कि बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण लोगों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में हृदय रोग, मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के खतरे को और बढ़ा सकती है।
महिलाओं और पुरुषों में बढ़ा मोटापा
सर्वे के अनुसार दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी मोटापे की दर बढ़ी है। खासतौर पर केरल और तमिलनाडु में महिलाओं में मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और फास्ट फूड का बढ़ता चलन इसकी बड़ी वजह है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब मोटापे की समस्या तेजी से फैल रही है। पहले यह समस्या मुख्य रूप से शहरों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब गांवों में भी लोगों की जीवनशैली में बदलाव देखने को मिल रहा है।
सी-सेक्शन डिलीवरी के मामलों में वृद्धि
सर्वे में यह भी खुलासा हुआ कि दक्षिणी राज्यों में सी-सेक्शन डिलीवरी की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सबसे अधिक सी-सेक्शन डिलीवरी दर्ज की गई। कई राज्यों में यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए स्तर से काफी ऊपर पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में चिकित्सकीय जरूरत के कारण सी-सेक्शन जरूरी होता है, लेकिन निजी अस्पतालों में इसकी बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन रही है। डॉक्टरों का मानना है कि सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने और गर्भवती महिलाओं को सही परामर्श देने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय औसत से अधिक आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी राज्यों में मोटापे और सी-सेक्शन दोनों के आंकड़े राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। महिलाओं में मोटापे की बढ़ती दर विशेष चिंता का विषय मानी जा रही है क्योंकि इसका असर गर्भावस्था और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जागरूकता अभियान और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने की जरूरत है। इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि मोटापे और अनावश्यक सी-सेक्शन डिलीवरी को रोकने के लिए व्यापक स्वास्थ्य अभियान चलाए जाएं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया गया है।
भविष्य के लिए चेतावनी
NFHS-6 के शुरुआती आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में गैर-संचारी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि लोगों की जीवनशैली में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रोकथाम और जागरूकता पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर स्वास्थ्य जांच से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
Reference The Hindu