बिहार में बढ़ रहे ब्रेन हेमरेज के मामले, विशेषज्ञों ने जताई चिंता और जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर

पटना 

बिहार में ब्रेन हेमरेज के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे लेकर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। हाल ही में आयोजित एक मेडिकल सम्मेलन में इस गंभीर बीमारी पर विस्तार से चर्चा की गई, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

सम्मेलन के दौरान बताया गया कि राज्य में हर साल बड़ी संख्या में लोग ब्रेन हेमरेज का शिकार हो रहे हैं। यह बीमारी न केवल जानलेवा साबित हो रही है, बल्कि कई मामलों में मरीजों को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 

300 से अधिक डॉक्टरों ने लिया हिस्सा

इस कार्यक्रम में 300 से ज्यादा डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने एकमत होकर कहा कि ब्रेन हेमरेज के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और हाई ब्लड प्रेशर है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिल पाने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।

 

10 लाख आबादी पर विशेषज्ञों की कमी

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बिहार में न्यूरोलॉजी के डॉक्टरों की भारी कमी है। अनुमान के अनुसार, लगभग 10 लाख लोगों पर एक विशेषज्ञ ही उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों को सही समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

 

लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि ब्रेन हेमरेज के शुरुआती संकेतों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर आना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

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आधुनिक तकनीक से इलाज संभव

सम्मेलन में यह भी बताया गया कि आज के समय में नई तकनीकों की मदद से ब्रेन हेमरेज का इलाज संभव है। अगर मरीज को समय पर सही अस्पताल पहुंचाया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है और स्थिति में सुधार भी लाया जा सकता है।

 

जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

विशेषज्ञों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अपील की कि इस बीमारी को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही, गांवों और छोटे शहरों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

 

बिहार में बढ़ते ब्रेन हेमरेज के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस स्थिति से निपटने के लिए जरूरी है कि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, समय पर जांच कराएं और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर सही समय पर कदम उठाए जाएं, तो इस खतरनाक बीमारी से कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

Reference Hindustan

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