न्यूज़ डेस्क पटना : कभी कांग्रेस की मज़बूत धरती माने जाने वाले मुंगेर की राजनीति अब बदलती तस्वीर पेश कर रही है। यह वही ज़िला है, जहां से बिहार के पहले मुख्यमंत्री ‘बिहार केशरी’ डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने हवेली खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनावी जीत दर्ज कर कांग्रेस को स्वर्णिम दौर दिया। वहीं, बनारसी प्रसाद सिंह भी कांग्रेस से सांसद चुने गए थे। उस समय मुंगेर कांग्रेस के लिए सबसे उपजाऊ राजनीतिक भूमि थी, लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट दिख रहे हैं।
कांग्रेस की कमज़ोर होती पकड़
भले ही आज जमालपुर विधानसभा से कांग्रेस के एक विधायक मौजूद हों और इसी जिले से एक विधान पार्षद भी आते हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कांग्रेस का जनाधार लगातार सिकुड़ रहा है। हाल ही में आयोजित वोटर अधिकार यात्रा के दौरान यह तस्वीर साफ दिखी।
जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी मुंगेर पहुंचे, तो यहां का माहौल उनके लिए उत्साहजनक साबित नहीं हुआ। यात्रा के दौरान वे कभी वाहन पर खड़े होकर तो कभी सीट पर बैठकर लोगों का अभिवादन करते दिखे, लेकिन उनके चेहरे पर नाखुशी साफ झलक रही थी। उत्साह की कमी कांग्रेस की कमजोर जमीनी पकड़ का संकेत देती रही।
तेजस्वी यादव का बढ़ता जोश
इसके विपरीत, यात्रा में शामिल राजद नेता तेजस्वी यादव पूरे समय गाड़ी पर खड़े रहे और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते दिखे। उनके चारों ओर राजद के झंडों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने कांग्रेस की स्थिति को और फीका कर दिया। यह साफ था कि जहां कांग्रेस अपने पुराने वोटरों को जोड़ने में नाकाम नज़र आई, वहीं राजद ने मौके का भरपूर फायदा उठाया।
जिला कांग्रेस में गुटबाज़ी
कांग्रेस की कमज़ोरी का एक बड़ा कारण उसकी आंतरिक खींचतान भी है। जमालपुर विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक, जो कुछ समय पहले तक कार्यकारी जिलाध्यक्ष भी थे, इस कार्यक्रम में पूरी तरह हाशिए पर दिखे। न केवल उनके बैनर और पोस्टर यात्रा से नदारद रहे, बल्कि उनके ही क्षेत्र सिंघिया गांव में उनके पोस्टर तक नहीं लगाए जाने दिए गए।
लोगों का मानना है कि यह सब कांग्रेस के भीतर टिकट की दौड़ का नतीजा है। कई नेता खुद को आगामी विधानसभा चुनाव में दावेदार के रूप में देख रहे हैं और इसी खींचतान में विधायक को हाशिए पर धकेलने की कोशिशें की जा रही हैं।
राजद की रणनीति
राजद कार्यकर्ता साफ संकेत दे रहे हैं कि वे चाहते हैं कि तालमेल की स्थिति में यह सीट राजद के खाते में जाए। उनकी मंशा यह है कि उनके वोटरों की बदौलत जीतने वाला प्रत्याशी राजद का ही हो, न कि किसी अन्य पार्टी का। यही कारण है कि मुंगेर में कांग्रेस की परंपरागत पकड़ लगातार कमजोर होती जा रही है।

चर्चा में रहा पप्पू यादव का पोस्टर
राहुल गांधी के रात्रि विश्राम स्थल पर भी कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति चर्चा का विषय बनी रही। यहां लगे बैनरों में जमालपुर विधायक की तस्वीर पूरी तरह नदारद थी, जबकि पूर्णिया सांसद राजीव रंजन उर्फ़ पप्पू यादव की बड़ी तस्वीर मौजूद थी। इससे कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस और नाराज़गी दोनों की स्थिति बनी रही।

















