बिहार में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बावजूद सरकारी खरीद ठप, किसानों की बढ़ी चिंता

पटना। बिहार में इस साल गेहूं की पैदावार ने नया रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन किसानों के लिए यह खुशी अधूरी रह गई है। उत्पादन में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी खरीद की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है, जिसके कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य में इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी हुई है। अनुकूल मौसम और किसानों की मेहनत के चलते उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस वर्ष उत्पादन में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इस उपलब्धि का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है, क्योंकि सरकारी स्तर पर खरीद की गति बेहद धीमी है।

सरकार द्वारा इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लगभग 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें बोनस जोड़कर कीमत और भी आकर्षक बनाई गई है। इसके बावजूद खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हैं। कई स्थानों पर अभी तक खरीद केंद्र शुरू ही नहीं हुए हैं, जबकि जहां शुरू हुए हैं, वहां भी प्रक्रियाएं जटिल और धीमी हैं।

किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर उन्हें बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर खरीद प्रक्रिया को तेज नहीं किया गया, तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही, बाजार में गेहूं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाए।

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वहीं, संबंधित विभाग का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही सभी केंद्र पूरी तरह सक्रिय हो जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।

कुल मिलाकर, रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद किसानों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब तक खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पटरी पर लाती है और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिला पाती है।

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