नई दिल्ली:
जून महीने की शुरुआत आम लोगों और कारोबारियों के लिए मिले-जुले संकेत लेकर आई है। एक ओर तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू एयरलाइंस को राहत देते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कटौती की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है।
देशभर में होटल, रेस्तरां, ढाबे और छोटे व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, सिलेंडर की कीमत में ₹24 तक की वृद्धि की गई है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर अब लगभग ₹1,797 में मिलने लगा है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी नई दरें लागू हो चुकी हैं।
पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में लगातार बदलाव देखा गया है। मार्च, अप्रैल और मई में भी कीमतों में कई बार संशोधन किया गया था। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की लागत बढ़ने और आयात खर्च में इज़ाफा होने के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार अभी भी घरेलू रसोई गैस पर सब्सिडी और मूल्य संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है ताकि आम परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। तेल कंपनियों के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर पर उन्हें प्रति सिलेंडर लगभग ₹30 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने का असर सीधे छोटे कारोबारियों और खाद्य उद्योग पर दिखाई देगा। होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेवाओं की लागत बढ़ सकती है, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। छोटे व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती गैस कीमतों से उनका संचालन खर्च काफी बढ़ गया है और इसका असर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
इसी बीच, एयरलाइन कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कटौती की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ATF के दाम में लगभग 2.7 प्रतिशत तक की कमी की गई है। दिल्ली में ATF अब करीब ₹76,500 प्रति किलोलीटर के स्तर पर पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा मौका है जब ATF की कीमतों में कमी की गई है।
एयरलाइन कंपनियों के लिए ATF सबसे बड़ा परिचालन खर्च माना जाता है। कीमतों में कमी से इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो घरेलू हवाई किरायों में भी कुछ कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल एयरलाइंस कंपनियों ने टिकट कीमतों में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण आने वाले समय में तेल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाला हर बदलाव घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कमर्शियल गैस की कीमतों में वृद्धि और ATF में राहत ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा बाजार फिलहाल अस्थिर दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ी है, वहीं एयरलाइन सेक्टर को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेगी कि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर इसका कितना असर पड़ेगा।
Reference The Hindu