गेहूं खरीद में नया रिकॉर्ड: 3.5 करोड़ टन के पार पहुंची सरकारी खरीद, किसानों को मिला बड़ा लाभ

नई दिल्ली।

देश में गेहूं की सरकारी खरीद ने इस वर्ष नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए अब तक 3.5 करोड़ टन (35 मिलियन टन) से अधिक गेहूं की खरीद की जा चुकी है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत अधिक है और सरकार के निर्धारित लक्ष्य से भी ऊपर पहुंच गई है। इस उपलब्धि को कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिला है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी और मजबूत हुई है।

 

लक्ष्य से आगे निकली खरीद प्रक्रिया

खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गेहूं खरीद का आंकड़ा 35 मिलियन टन को पार कर चुका है। यह मात्रा सरकार द्वारा तय किए गए लगभग 34.5 मिलियन टन के लक्ष्य से अधिक है। पिछले वर्ष के मुकाबले भी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस बार किसानों ने बड़ी मात्रा में अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेची।

सरकारी एजेंसियां, विशेष रूप से भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य स्तरीय खरीद एजेंसियां, किसानों से MSP पर गेहूं खरीद रही हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए पर्याप्त खाद्यान्न भंडारण सुनिश्चित करना है।

 

उत्पादन में मजबूती और मंडियों में बेहतर आवक

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष गेहूं उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। कुछ क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियां देखने को मिलीं, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन मजबूत रहने से मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ी। यही कारण है कि खरीद एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में गेहूं प्राप्त हुआ और खरीद का आंकड़ा तेजी से बढ़ा।

See also  23 फरवरी 2026 का राशिफल

किसानों ने भी खुले बाजार के बजाय सरकारी खरीद केंद्रों को प्राथमिकता दी, क्योंकि MSP पर उन्हें स्थिर और भरोसेमंद मूल्य मिला। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

 

राज्यों का महत्वपूर्ण योगदान

इस रिकॉर्ड खरीद में कई प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब ने सबसे अधिक योगदान दिया, जहां खरीद का आंकड़ा 12 मिलियन टन से अधिक पहुंच गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विशेष रूप से मध्य प्रदेश ने पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। राज्य में खरीद का स्तर लगभग 11.9 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले सीजन के मुकाबले काफी अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में गेहूं उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था दोनों में सुधार हुआ है।

 

मौसम की चुनौतियों के बावजूद सफलता

रबी सीजन के दौरान कुछ इलाकों में असमय बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई थीं। इन परिस्थितियों को देखते हुए शुरुआती दौर में उत्पादन और खरीद को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। हालांकि, किसानों की मेहनत और सरकारी खरीद व्यवस्था की सक्रियता के कारण इन चुनौतियों का प्रभाव सीमित रहा।

कई क्षेत्रों में फसल को नुकसान पहुंचने के बावजूद कुल खरीद में वृद्धि दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्पादन क्षमता मजबूत बनी हुई है।

 

खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बल

सरकार के लिए यह रिकॉर्ड खरीद बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में पर्याप्त गेहूं भंडार होना आवश्यक है।

See also  मौसम की मार से चिंतित लीची किसान: इस बार बागों में कम दिख रहा बौर, उत्पादन घटने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड खरीद से सरकार के भंडार मजबूत होंगे और भविष्य में खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की समस्या की संभावना कम होगी। साथ ही बाजार में कीमतों को संतुलित बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

 

किसानों के लिए सकारात्मक संकेत

सरकारी खरीद में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। MSP पर बड़ी मात्रा में बिक्री होने से किसानों की आय में सुधार हुआ है और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी इससे गति मिलने की संभावना है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खरीद व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाया जाए, तो आने वाले वर्षों में किसानों की भागीदारी और बढ़ सकती है। इससे कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

 

देश में गेहूं की सरकारी खरीद का 3.5 करोड़ टन का आंकड़ा पार करना कृषि क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बेहतर उत्पादन, प्रभावी खरीद व्यवस्था और किसानों की सक्रिय भागीदारी ने इस रिकॉर्ड को संभव बनाया है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिला है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हुई है। आने वाले महीनों में यह उपलब्धि कृषि और खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Reference The Hindu

Related Posts

भीषण गर्मी से भारत के दुग्ध उत्पादन पर संकट

बढ़ते तापमान ने डेयरी किसानों की चिंता बढ़ाई, दूध देने वाले पशुओं की सेहत और उत्पादन दोनों प्रभावित नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ती गर्मी अब केवल इंसानों के लिए…

Read more

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा CBSE का तीन-भाषा नियम, अभिभावकों और छात्रों ने जताई चिंता

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए लागू किए गए तीन-भाषा नियम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। देशभर के कई अभिभावकों…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा