2028 में भुवनेश्वर बनेगा विश्व इंडोर एथलेटिक्स का मेज़बान, भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भुवनेश्वर

भारत के खेल इतिहास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ने जा रही है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा इंडोर स्टेडियम को वर्ष 2028 में आयोजित होने वाली विश्व इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेज़बानी सौंपी गई है। इस फैसले के साथ भारत को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की जिम्मेदारी मिली है, जो देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मिली मान्यता

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, यह फैसला विश्व एथलेटिक्स परिषद की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें भारत की तैयारियों और सुविधाओं को सराहा गया। इससे साफ है कि वैश्विक खेल संगठनों का भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

 

कलिंगा स्टेडियम बना खास आकर्षण

भुवनेश्वर का कलिंगा इंडोर स्टेडियम देश का एक आधुनिक और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस परिसर है। यह भारत का पहला ऐसा इनडोर स्टेडियम है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। यहां खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।

 

निरीक्षण के बाद लिया गया फैसला

बताया गया कि विश्व एथलेटिक्स की एक टीम ने इस वर्ष की शुरुआत में स्टेडियम का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान स्टेडियम की गुणवत्ता, ट्रैक और अन्य व्यवस्थाओं से अधिकारी काफी प्रभावित हुए, जिसके बाद इस आयोजन के लिए भुवनेश्वर को चुना गया।

 

भारत में लंबे समय बाद बड़ा आयोजन

भारत में आखिरी बार कोई बड़ा वैश्विक एथलेटिक्स आयोजन 2004 में आयोजित हुआ था, जब दिल्ली में वर्ल्ड हाफ मैराथन का आयोजन किया गया था। ऐसे में 2028 का यह आयोजन भारतीय खेल जगत के लिए एक नई शुरुआत की तरह देखा जा रहा है।

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राष्ट्रीय और एशियाई प्रतियोगिताओं की तैयारी

कलिंगा स्टेडियम में जल्द ही राष्ट्रीय स्तर की इनडोर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा, यह स्टेडियम 2028 में एशियाई इंडोर चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हाल ही में एशियाई एथलेटिक्स संघ की टीम ने भी यहां का निरीक्षण किया था।

 

खेलों के विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस आयोजन से न केवल भुवनेश्वर बल्कि पूरे भारत में एथलेटिक्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच देखने और सीखने का मौका मिलेगा, जिससे खेल संस्कृति को मजबूती मिलेगी।

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