शेयर बाजार में भारी गिरावट: तेल कीमतों में उछाल से निवेशकों में घबराहट

मुंबई: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां प्रमुख सूचकांक 3% से अधिक लुढ़क गए। इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने अहम भूमिका निभाई।

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई बढ़ने के संकेतों ने बाजार के माहौल को और कमजोर कर दिया।

 

बाजार में व्यापक गिरावट

दिनभर के कारोबार के दौरान लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटो, रियल्टी, फाइनेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। आईटी और कैपिटल गुड्स भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे।

वहीं, FMCG, हेल्थकेयर, ऑयल एंड गैस, एनर्जी और पावर सेक्टर में भी कमजोरी दर्ज की गई, हालांकि इन क्षेत्रों में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।

 

प्रमुख सूचकांकों का हाल

कारोबार की शुरुआत में निफ्टी करीब 23,197 अंकों पर खुला, जबकि सेंसेक्स 74,750 के स्तर पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार गिरावट जारी रही और ये अपने निचले स्तर तक फिसल गए।

अंत में निफ्टी लगभग 23,002 और सेंसेक्स करीब 74,207 अंकों पर बंद हुए। यह स्तर 2024 के मध्य के आसपास देखे गए स्तरों के बराबर है, जिससे साफ है कि बाजार ने पिछले कई महीनों की बढ़त गंवा दी

 

निवेशकों के लिए संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि महंगाई पर काबू नहीं पाया गया, तो बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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हाल के वर्षों में बड़ी गिरावट

यह 2021 के बाद पांचवीं बार है जब बाजार में 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले जून 2024 में बाजार में 5% से अधिक की गिरावट देखी गई थी, जिसे हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट माना जाता है।

 

तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजार की स्थिरता को झटका दिया है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

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