मौत का करंट: बिहार में बिजली सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

Special Report| The Newsic

बिहार में आज लगभग हर गाँव तक बिजली पहुँच चुकी है। सरकार और विभाग की ओर से विद्युतीकरण को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन इसी बिजली से जुड़े हादसे समय-समय पर कई परिवारों की दुनिया उजाड़ देते हैं।

हर साल बारिश और गर्मी के मौसम में करंट लगने, शॉर्ट सर्किट, तार टूटने और आग लगने की घटनाएँ सामने आती हैं। यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगाती, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है, जहाँ सुधार की ज़रूरत लगातार महसूस की जा रही है।

एक खामोश त्रासदी: जब घर का चिराग बुझ जाता है

ग्रामीण इलाकों में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ:

  • बारिश के बाद गली में करंट दौड़ जाता है

  • खेत में काम कर रहे किसान को ट्रांसफार्मर या ढीले तार से करंट लग जाता है

  • सड़क किनारे झुके पोल और लटकते तार हादसे का कारण बनते हैं

अक्सर इन घटनाओं को “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” कहकर आगे बढ़ जाया जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है — क्या इन्हें रोका नहीं जा सकता?

मौत का जाल बनते पुराने तार?

बिहार के कई जिलों में अब भी पुराने, खुले एल्युमीनियम तारों का इस्तेमाल देखा जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • खुले तार बारिश में अधिक जोखिम पैदा करते हैं

  • तेज हवा और गर्मी में तार ढीले या टूट सकते हैं

  • लोड बढ़ने पर शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ती है

कई राज्यों में अब ABC (Aerial Bunched Cable) का उपयोग बढ़ाया गया है, जो कवर्ड केबल होने के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। सवाल यह है कि क्या बिहार में भी इस दिशा में तेज़ी से काम होना चाहिए?

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ट्रांसफार्मर: सुरक्षा या खतरा?

शहरों और गाँवों में सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मरों के आसपास अक्सर:

  • मजबूत जाली (फेंसिंग) नहीं होती

  • चेतावनी बोर्ड स्पष्ट नहीं होते

  • अर्थिंग की स्थिति संदिग्ध रहती है

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों और पशुओं के लिए यह जोखिमपूर्ण हो सकता है। कई बार शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएँ भी चर्चा में आती रही हैं।

गर्मी शुरू, समस्याएँ शुरू

जैसे ही गर्मी बढ़ती है:

  • लोड बढ़ने से लो वोल्टेज और हाई वोल्टेज की समस्या

  • वोल्टेज फ्लक्चुएशन

  • घरेलू उपकरण जलने की शिकायत

  • तार टूटने और ट्रिपिंग की घटनाएँ

ग्रामीण इलाकों में सिंचाई पंप और छोटे उद्योग भी इससे प्रभावित होते हैं। कई उपभोक्ता बताते हैं कि वोल्टेज का उतार-चढ़ाव लगभग रोज़ की समस्या बन चुका है।

शिकायत प्रणाली: ज़मीन पर क्या हाल?

हालाँकि विभाग की ओर से हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई उपभोक्ताओं की शिकायतें हैं कि:

  • जेई (Junior Engineer) से संपर्क करना आसान नहीं

  • कॉल रिसीव नहीं होती या देरी से जवाब मिलता है

  • शिकायत दर्ज होने के बाद समाधान में लंबा समय लगता है

यह अनुभव हर जगह समान नहीं हो सकता, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी बातें बार-बार सुनाई देती हैं।

हर साल जानलेवा घटनाएँ — क्या डेटा पारदर्शी है?

बिजली से जुड़े हादसों की सटीक संख्या पर सार्वजनिक डेटा सीमित दिखाई देता है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में हर वर्ष कई लोगों की मौत और घायल होने की खबरें आती रहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर दुर्घटना की स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक रिपोर्टिंग हो, तो जवाबदेही और सुधार दोनों संभव हैं।

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कानूनी अधिकार: आम नागरिक क्या जानें?

भारतीय कानून में “Strict Liability” का सिद्धांत लागू होता है। इसका अर्थ है कि यदि बिजली विभाग के उपकरण से दुर्घटना होती है, तो संबंधित एजेंसी पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है, भले ही लापरवाही साबित हो या नहीं।

राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, बिजली दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में मुआवजा राशि (अक्सर 4–5 लाख रुपये तक, प्रचलित नियमों के अनुसार) दी जाती है।

लेकिन सवाल वही है — क्या मुआवजा किसी परिवार के नुकसान की भरपाई कर सकता है?

समाधान: क्या हो सकती है ठोस पहल?

विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों के सुझाव:

  1. हर मानसून से पहले अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट

  2. खुले तारों की जगह ABC केबल

  3. सभी ट्रांसफार्मरों की घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड

  4. पोल और अर्थिंग की नियमित जांच

  5. शिकायतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

  6. वोल्टेज स्टेबलाइजेशन के लिए स्थानीय ग्रिड अपग्रेड

विकास के साथ सुरक्षा भी ज़रूरी

बिहार में बिजली कनेक्शन की संख्या बढ़ना निश्चित रूप से एक उपलब्धि है। लेकिन विकास का असली अर्थ तब होगा जब हर घर तक पहुँचने वाली बिजली पूरी तरह सुरक्षित भी हो।

हर वह तार जो झूल रहा है, हर वह पोल जो टेढ़ा है, हर वह ट्रांसफार्मर जो बिना जाली के खड़ा है — वह सिर्फ एक तकनीकी कमी नहीं, बल्कि संभावित खतरा भी हो सकता है।

Ayush Mishra

journalist

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