नई दिल्ली: महिलाओं के गर्भ पर जबरदस्ती नहीं, अनुच्छेद 21 के तहत मिला अधिकार – सुप्रीम कोर्ट

महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भधारण जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आने वाले “जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता” का हिस्सा है।

 

अनुच्छेद 21 का क्या है मतलब?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुच्छेद 21 केवल जीने का अधिकार नहीं देता, बल्कि यह व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने और अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने की आज़ादी भी देता है। इसमें महिला का यह अधिकार भी शामिल है कि वह अपने गर्भ को लेकर क्या निर्णय लेना चाहती है।

 

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला के शरीर पर उसका पूरा अधिकार है। किसी भी प्रकार का दबाव डालकर उसे गर्भ बनाए रखने के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि ऐसे मामलों में महिला की सहमति सबसे अहम है।

 

मामले की पृष्ठभूमि

यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिसमें महिला ने अपने गर्भ से जुड़े फैसले के लिए अदालत से अनुमति मांगी थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया।

 

महिला की पसंद को प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे महिला शादीशुदा हो या अविवाहित, उसे समान अधिकार प्राप्त हैं। उसकी इच्छा के खिलाफ कोई भी निर्णय थोपना कानूनन गलत है।

 

कानून का उद्देश्य

See also  रेलवे का बड़ा डिजिटल बदलाव: अब “सुपर ऐप” से ही होगी टिकट बुकिंग

कोर्ट ने कहा कि कानून का काम केवल नियम बनाना नहीं है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है। ऐसे मामलों में अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिला के अधिकारों का पूरा सम्मान हो।

 

समाज के लिए संदेश

इस फैसले के जरिए अदालत ने समाज को भी यह संदेश दिया है कि महिलाओं के शरीर और उनके निर्णयों का सम्मान करना जरूरी है। यह फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर न्यायपालिका गंभीर है। अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकार महिलाओं को अपने जीवन और शरीर से जुड़े फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता देते हैं।

Reference Hindustan

Related Posts

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

मुंबई। महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ-शिशु देखभाल के क्षेत्र में प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन जन्म के समय लड़कियों और लड़कों के अनुपात को लेकर राज्य की स्थिति…

Read more

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.7…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

खान सर फायरिंग मामले में पुलिस की कार्रवाई, कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा पर सरकार सख्त

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात चिंता का विषय, सुधार के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पीछे

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% GDP वृद्धि का अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूत रफ्तार

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रकृति को बचाने का संकल्प लेने का दिन

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, ICU में भर्ती 5 मरीजों की मौत, कई घायल

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा

मारुति सुजुकी ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, एथेनॉल आधारित तकनीक से मिलेगी नई दिशा