गया पहुंचे मुकेश अंबानी, विष्णुपद मंदिर में किया पिंडदान

न्यूज़ डेस्क पटना :  रिलायंस समूह के अध्यक्ष और देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी शुक्रवार की शाम अपने छोटे बेटे अनंत अंबानी के साथ विशेष विमान से गया पहुंचे। पिता-पुत्र ने यहां स्थित प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में पारंपरिक तरीके से पिंडदान कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की।

करीब एक घंटे तक चले इस वैदिक अनुष्ठान का संचालन आचार्य श्याम बिहारी पांडे के नेतृत्व में हुआ। अनुष्ठान के दौरान मुकेश अंबानी और अनंत पूरी आस्था और तन्मयता के साथ बैठे रहे। दोनों ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान विष्णु के चरणचिह्न पर पिंड अर्पित किया, नमन किया और परिक्रमा की। इसके बाद माता लक्ष्मी के दर्शन भी किए और आशीर्वाद लिया।

विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि अंबानी परिवार ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि गया में पिंडदान करना बेहद दुर्लभ और पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और परिवार के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

अनुष्ठान के दौरान मुकेश अंबानी ने फल्गु नदी, विष्णुपद और अक्षयवट पर भी धार्मिक विधियां संपन्न कीं। यह स्थान गया के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिने जाते हैं और इन्हें पितृ तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। अनुष्ठान के समापन पर विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से मुकेश अंबानी को विष्णु चरणचिह्न और अंगवस्त्र भेंट किए गए।

पूरे कार्यक्रम के दौरान अंबानी पिता-पुत्र ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। वे सीधे मंदिर परिसर पहुंचे और अनुष्ठान पूरा करने के बाद लौट गए। उनके आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। गया एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा और आम श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई।

See also  होली पर यात्रियों को बड़ी राहत, 800 विशेष ट्रेनों का संचालन

तय कार्यक्रम के अनुसार, अंबानी पिता-पुत्र अनुष्ठान समाप्त होने के बाद देर रात विशेष विमान से मुंबई लौट गए। हालांकि उनके अल्प प्रवास ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

गया का विष्णुपद मंदिर श्राद्ध पक्ष में विशेष महत्व रखता है। इस दौरान देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपने पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान पितरों को मोक्ष दिलाता है और जीवित परिवारजनों पर ईश्वरीय आशीर्वाद बनाए रखता है। यही कारण है कि पितृ पक्ष के समय गया का महत्व और भी बढ़ जाता है।

news source: Trusted social sites

Ayush Mishra

journalist

Related Posts

नीदरलैंड्स में अमृता शेरगिल की कला का ऐतिहासिक प्रदर्शन, भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

नई दिल्ली  भारत की महान चित्रकार अमृता शेरगिल की कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान बनाने जा रही है। नई दिल्ली स्थित नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA)…

Read more

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, वैश्विक विकास के लिए साथ मिलकर करेंगे काम

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर दुनिया के सामने मजबूत रूप में दिखाई दी। हाल ही में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

नीदरलैंड्स में अमृता शेरगिल की कला का ऐतिहासिक प्रदर्शन, भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

नीदरलैंड्स में अमृता शेरगिल की कला का ऐतिहासिक प्रदर्शन, भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, वैश्विक विकास के लिए साथ मिलकर करेंगे काम

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, वैश्विक विकास के लिए साथ मिलकर करेंगे काम

भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात में शानदार बढ़ोतरी, अप्रैल 2026 में 9% से अधिक की वृद्धि

भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात में शानदार बढ़ोतरी, अप्रैल 2026 में 9% से अधिक की वृद्धि

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की मजबूत आवाज, जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर दिया बड़ा संदेश

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की मजबूत आवाज, जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर दिया बड़ा संदेश

पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा आज से शुरू, वैश्विक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा आज से शुरू, वैश्विक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देता है ‘नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज़ डे 2026’

संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देता है ‘नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज़ डे 2026’