1 फरवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट बीते शुक्रवार की भारी बिकवाली का ही असर मानी जा रही है। मुनाफावसूली और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने बाजार की धारणा को कमजोर किया।
यूनियन बजट 2026 के चलते MCX को रविवार को विशेष ट्रेडिंग सत्र के लिए खोला गया। सुबह करीब 10 बजे MCX गोल्ड 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, जिसमें करीब 6.7% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं MCX सिल्वर 2,65,701 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जो लगभग 9% नीचे थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार बंद होने के कारण वैश्विक संकेत नहीं मिल सके। ऐसे में बजट से जुड़े घरेलू फैक्टर्स ही कीमतों के उतार-चढ़ाव की दिशा तय करते नजर आए। बीते हफ्ते रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद कीमती धातुओं में यह गिरावट स्वाभाविक करेक्शन मानी जा रही है। हालांकि दाम अभी भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, इसलिए निवेशकों की नजर हर छोटे मूवमेंट पर टिकी हुई है।
डॉलर की मजबूती बनी गिरावट की बड़ी वजह
इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी खबरों की अहम भूमिका रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को अगला फेड चेयर चुने जाने की घोषणा से फेड की स्वतंत्रता पर भरोसा बढ़ा और डॉलर मजबूत हुआ। डॉलर इंडेक्स 97 के स्तर के ऊपर पहुंच गया।
आमतौर पर डॉलर के मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव बनता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का दाम डॉलर में तय होता है। डॉलर महंगा होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे मांग कमजोर हो जाती है।
भारत पर क्या पड़ता है असर?
भारत अपनी सोने की लगभग पूरी जरूरत और 80% से ज्यादा चांदी का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे घरेलू बाजार को प्रभावित करता है। पिछले साल सोने-चांदी के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च हुई, जिससे व्यापार घाटा बढ़ा।
इसके अलावा, रुपया हाल के दिनों में रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास रहा है। ये सभी फैक्टर्स बजट के बाद सोने-चांदी की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेश के तौर पर बढ़ी चमक
महंगे दामों के चलते गहनों की खरीदारी में थोड़ी सुस्ती जरूर आई है, लेकिन निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है।
2025 में गोल्ड ETF की कुल संपत्ति करीब तीन गुना बढ़ गई। शेयर बाजार में कमजोर रिटर्न के बीच निवेशकों ने सुरक्षा के लिहाज से इसमें 400 अरब रुपये से ज्यादा का निवेश किया।
सिल्वर ETF में तो इससे भी ज्यादा तेजी देखने को मिली है। निवेशक अब सोने से आगे बढ़कर ज्यादा रिटर्न की संभावना वाले विकल्प तलाशते दिख रहे हैं।
तकनीकी नजरिया: आगे क्या संकेत?
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, MCX गोल्ड फ्यूचर्स को ₹1,80,000–₹1,81,000 के पास मजबूत रेजिस्टेंस मिला, जिसके बाद भारी बिकवाली शुरू हुई और दाम ₹1,36,000 तक फिसल गए।
उनका कहना है कि सोने को ₹1,32,000–₹1,35,000 के दायरे के ऊपर टिके रहना जरूरी है। जब तक कीमतें दोबारा ₹1,45,000 के ऊपर नहीं जातीं, तब तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
चांदी में इतनी तेज गिरावट क्यों?
चांदी ने ₹4,20,000 के आसपास रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद ‘ब्लो-ऑफ टॉप’ जैसा व्यवहार दिखाया। इसके बाद कीमतें तेजी से गिरकर ₹2,84,000 तक आ गईं। यह लीवरेज्ड पोजीशन में फंसे निवेशकों की घबराहट भरी बिकवाली का संकेत देता है।
फिलहाल ₹2,60,000–₹2,55,000 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ₹3,00,000–₹3,10,000 की ओर कोई भी उछाल फिर से बिकवाली के दबाव में आ सकता है।
आगे की राह: सावधानी जरूरी
जानकारों के मुताबिक, हालिया तेज गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और फिएट करेंसी से हटकर निवेश का रुझान सोने को समर्थन दे रहा है।
वहीं चांदी को ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर से मजबूत औद्योगिक मांग मिल रही है।
हालांकि, छोटी अवधि में अस्थिरता बनी रह सकती है, इसलिए विशेषज्ञ नई पोजीशन लेने से पहले कीमतों की स्थिरता और प्रमुख सपोर्ट लेवल पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।

















