नई दिल्ली:
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से इस महीने के अंत में राजधानी नई दिल्ली में चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अफ्रीका के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह सम्मेलन भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा।
सूत्रों के अनुसार, यह बहुपक्षीय सम्मेलन 31 मई को आयोजित होगा, जबकि इससे पहले 28 मई को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 29 मई को विदेश मंत्रियों की विशेष बैठक रखी जाएगी। इन बैठकों में विभिन्न समझौतों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी, ताकि मुख्य सम्मेलन के दौरान बड़े फैसलों को अंतिम रूप दिया जा सके।
भारत पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत करता आया है। ऊर्जा, कृषि, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत की भागीदारी अफ्रीका में तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को नई गति देने का काम करेगा।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि विकास, व्यापार और साझा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना भी है। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा युवाओं के कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग को लेकर कई नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है।
भारत अफ्रीकी देशों के लिए लंबे समय से एक भरोसेमंद साझेदार रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने कई अफ्रीकी देशों को दवाइयों और वैक्सीन की आपूर्ति कर अपनी मित्रता को और मजबूत किया था। अब यह सम्मेलन दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
राजधानी नई दिल्ली में सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मेहमानों के स्वागत तक सभी स्तरों पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस सम्मेलन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अफ्रीका के बीच बढ़ती साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। यही कारण है कि इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं।
Reference Akashvani