BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की मजबूत आवाज, जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आयोजित BRICS India 2026 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने दुनिया के सामने कई अहम वैश्विक मुद्दों को मजबूती से उठाया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय दुनिया के लिए बेहद जटिल और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। इसका सबसे अधिक असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे समय में BRICS देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऊर्जा संकट, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

 

ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

डॉ. जयशंकर ने कहा कि दुनिया को ऊर्जा, खाद्यान्न, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का अधिक प्रभावी तरीके से सामना करना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि कई देशों में आर्थिक अस्थिरता और संघर्षों के कारण आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।

भारत ने इस दौरान सहयोग आधारित वैश्विक व्यवस्था की वकालत की और कहा कि विकासशील देशों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

सुरक्षित समुद्री मार्गों को बताया वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों में किसी भी प्रकार की बाधा दुनिया की सप्लाई चेन और व्यापार को प्रभावित कर सकती है।

भारत ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे।

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मजबूत सप्लाई चेन की आवश्यकता

अपने संबोधन में जयशंकर ने भरोसेमंद सप्लाई चेन और विविध बाजारों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया ने देखा है कि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक संकट को बढ़ा सकती है।

भारत ने सुझाव दिया कि देशों को आपसी सहयोग बढ़ाकर व्यापारिक नेटवर्क को मजबूत बनाना चाहिए, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहे और संकट के समय भी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो।

 

जलवायु परिवर्तन पर संतुलित दृष्टिकोण

BRICS बैठक में जलवायु परिवर्तन भी प्रमुख मुद्दा रहा। विदेश मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करते समय समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलवायु नीतियां बनाई जानी चाहिए ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।

 

तकनीक को बताया समावेशी विकास का माध्यम

डॉ. जयशंकर ने आधुनिक तकनीक को सुशासन और समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक लोगों के जीवन को आसान बना सकती है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, भरोसा और समान पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

भारत ने तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए।

 

आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा पर सख्त रुख

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते संघर्ष और आतंकवाद वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं।

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भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन चुनौतियों का समाधान संवाद, कूटनीति और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही संभव है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

 

बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग

बैठक के दौरान भारत ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को भी उठाया। जयशंकर ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बदलाव जरूरी है ताकि विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

उन्होंने BRICS देशों से मिलकर ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाने की अपील की जो अधिक न्यायसंगत, संतुलित और प्रभावी हो।

 

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाती है। भारत लगातार वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज उठाता रहा है। BRICS मंच पर भी भारत ने सहयोग, शांति और संतुलित विकास की नीति को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में BRICS देशों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में भारत का यह संदेश वैश्विक सहयोग और स्थिरता की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Reference Akashvani

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