बिहार के आंगनबाड़ी केंद्रों ने स्वास्थ्य कार्ड वितरण में देश में बनाई मजबूत पहचान, तीसरे स्थान पर पहुंचा राज्य

पटना, 

बिहार ने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम अभियान में देशभर में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के लिए बनाए जा रहे हेल्थ कार्ड के मामले में राज्य अब राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि न सिर्फ सरकारी प्रयासों को दर्शाती है, बल्कि जमीनी स्तर पर हो रहे सुधारों की भी तस्वीर पेश करती है।

राज्य में हजारों आंगनबाड़ी केंद्र सक्रिय रूप से बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने में जुटे हैं। इन कार्डों के जरिए बच्चों की नियमित जांच, पोषण स्थिति और इलाज से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। इससे अभिभावकों को समय-समय पर बच्चों की सेहत के बारे में अपडेट मिलता रहता है।

 

आंकड़ों में समझें स्थिति

बिहार में वर्तमान में 57.82% बच्चों के पास हेल्थ कार्ड उपलब्ध हैं

इस सूची में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां लगभग 79.89% बच्चों के कार्ड बने हैं

राजस्थान दूसरे स्थान पर है, जहां करीब 61.03% बच्चों को कवर किया गया है

अन्य राज्यों की तुलना में बिहार ने बीते एक साल में तेज़ी से सुधार किया है

 

तेजी से बढ़ी प्रगति

पिछले वर्ष की शुरुआत में बिहार में बहुत कम बच्चों के पास हेल्थ कार्ड थे। लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है। सरकार और विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और दिशा-निर्देशों के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों ने इस अभियान को गति दी है।

विशेष रूप से आईसीडीएस (समेकित बाल विकास सेवा) विभाग ने इस योजना को प्राथमिकता दी है। सभी केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि हर बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी बच्चे की स्वास्थ्य जानकारी छूट न जाए।

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हेल्थ कार्ड से क्या लाभ मिलते हैं?

हेल्थ कार्ड सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव है। इसके जरिए:

हर 6 महीने में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है

वजन, लंबाई, आंख, कान, गला और दांतों की स्थिति की जांच संभव होती है

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है

गंभीर बीमारियों की पहचान जल्दी हो पाती है

जरूरत पड़ने पर बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है

कुपोषित बच्चों की पहचान आसान हो जाती है

 

जमीनी स्तर पर बदलाव की कहानी

गांवों और कस्बों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद अहम हो गई है। वे घर-घर जाकर बच्चों का पंजीकरण कर रही हैं और अभिभावकों को स्वास्थ्य कार्ड के फायदे समझा रही हैं।

कई परिवारों के लिए यह कार्ड पहली बार बच्चों के स्वास्थ्य का व्यवस्थित रिकॉर्ड बन रहा है। इससे न सिर्फ इलाज आसान हुआ है, बल्कि बच्चों की सेहत को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।

 

आगे क्या है चुनौती?

हालांकि बिहार ने बड़ी छलांग लगाई है, लेकिन अभी भी लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों को जल्द से जल्द हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जाए।

अगर इसी गति से काम जारी रहा, तो आने वाले समय में बिहार इस सूची में और ऊपर पहुंच सकता है।

 

बिहार का यह प्रयास दिखाता है कि सही योजना, मजबूत निगरानी और जमीनी स्तर पर मेहनत से बड़े बदलाव संभव हैं। हेल्थ कार्ड जैसी पहल बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के समग्र विकास में भी योगदान देगा।

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Reference Hindustan

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