हॉन्ग कॉन्ग में आयोजित एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर पूरे अभियान को यादगार बना दिया। युवा खिलाड़ियों के जोश, मेहनत और आत्मविश्वास ने भारतीय दल को प्रतियोगिता में मजबूत पहचान दिलाई।
महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने न केवल गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि नया मीट रिकॉर्ड बनाकर भी इतिहास रच दिया। टीम में शामिल भूमिका सरोज, भूमीका, तहूरा खातून और नीरू पाथक ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए रेस को शानदार अंदाज में पूरा किया। भारतीय टीम ने 3 मिनट 38.07 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। कजाकिस्तान की टीम दूसरे स्थान पर रही।
इस जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ में खुशी की लहर देखने को मिली। युवा एथलीटों ने तिरंगा लहराते हुए अपनी सफलता का जश्न मनाया। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारत की नई पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत होती जा रही है।
महिला टीम की सफलता के अलावा भारत को पुरुषों की 4×400 मीटर रिले स्पर्धा में भी कांस्य पदक मिला। भारतीय टीम के पियूष राज, सैयद सबीर, रंजीत कुमार और मो. अशफाक ने बेहतरीन दौड़ लगाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। टीम ने 3 मिनट 05.54 सेकंड का समय निकाला। चीन ने इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि कतर दूसरे स्थान पर रहा।
प्रतियोगिता में भारत के व्यक्तिगत खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। वेंकटराम रेड्डी मोगली ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर सबको प्रभावित किया। उन्होंने 1 मिनट 48.27 सेकंड का समय निकालते हुए अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
महिला 5000 मीटर दौड़ में मुस्कान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन नियंत्रण बनाए रखा और अंत तक बढ़त कायम रखी। उनकी जीत ने भारत के पदकों की संख्या में और इजाफा किया।
इसके अलावा पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में निश्छय ने रजत पदक जीतकर भारत को एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई। उन्होंने 60.10 मीटर का थ्रो करते हुए अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। युवा खिलाड़ी का यह प्रदर्शन भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारतीय दल ने इस चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि देश के युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी से कम नहीं हैं। खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ने भारत को प्रतियोगिता में मजबूत स्थिति दिलाई। आने वाले वर्षों में यही खिलाड़ी भारत की सीनियर टीम की ताकत बन सकते हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जूनियर स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। लगातार बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने से भारतीय खिलाड़ी वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
Reference The Hindu