देश में मई महीने के दौरान ईंधन खपत के आंकड़ों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। पेट्रोल और डीजल की मांग में जहां बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं रसोई गैस यानी LPG की खपत में गिरावट आई है। सरकार के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों के मौसम, परिवहन गतिविधियों और ग्रामीण-शहरी उपभोग के बदलते पैटर्न का असर ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दिया।
तेल कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि देश में यात्रा, माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है। दूसरी ओर, LPG की खपत में आई कमी के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं।
पेट्रोल की मांग में मजबूती
मई महीने में पेट्रोल की खपत में लगभग 2.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। माना जा रहा है कि गर्मी की छुट्टियों, शादी-विवाह के सीजन और यात्राओं में बढ़ोतरी के कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या अधिक रही। निजी वाहनों के उपयोग में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल की मांग पर पड़ा।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता भी निजी वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ा रही है। इसके अलावा छोटे शहरों और कस्बों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे पेट्रोल की खपत मजबूत बनी हुई है।
मई के दौरान देश में पेट्रोल की कुल खपत लगभग 3.89 मिलियन टन के आसपास पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रही।
डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी
डीजल की मांग में भी हल्की लेकिन महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार डीजल खपत में एक प्रतिशत से कम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि यह वृद्धि सीमित रही, लेकिन विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था की सक्रियता का संकेत मान रहे हैं।
देश में ट्रकों, बसों, कृषि उपकरणों और औद्योगिक मशीनों में बड़े स्तर पर डीजल का उपयोग होता है। गर्मियों में निर्माण कार्य, कृषि गतिविधियां और माल परिवहन बढ़ने से डीजल की मांग को समर्थन मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों की तुलना में बाजार में स्थिरता आने से परिवहन क्षेत्र में गतिविधियां बेहतर हुई हैं। इससे डीजल की खपत को मजबूती मिली।
LPG खपत में 19 प्रतिशत की गिरावट
जहां पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी, वहीं LPG की खपत में लगभग 19 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मई महीने में LPG की कुल खपत करीब 2.12 मिलियन टन रही।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरिम बुकिंग अवधि और आपूर्ति संबंधी बदलावों के कारण देखी गई। कई उपभोक्ताओं ने सिलेंडर बुकिंग को टाल दिया, जिसका असर कुल खपत के आंकड़ों पर पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई परिवार पारंपरिक ईंधनों का उपयोग करते हैं। इसके अलावा गैस सिलेंडर की कीमतों और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव ने भी LPG की मांग को प्रभावित किया है।
PNG कनेक्शन का भी असर
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बड़े शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लगातार बढ़ रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में लोग धीरे-धीरे सिलेंडर आधारित व्यवस्था से PNG की ओर बढ़ रहे हैं। इसका असर भी LPG की खपत पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव अभी सीमित स्तर पर है और देशभर में LPG की मांग पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव फिलहाल नहीं पड़ा है। लेकिन आने वाले वर्षों में शहरी गैस नेटवर्क के विस्तार से घरेलू ईंधन खपत के पैटर्न में बदलाव संभव है।
एटीएफ की मांग में भी कमी
रिपोर्ट में विमान ईंधन यानी ATF की खपत में भी हल्की गिरावट का उल्लेख किया गया है। यह कमी लगभग 0.8 प्रतिशत के आसपास रही। माना जा रहा है कि कुछ मार्गों पर उड़ानों में कमी और परिचालन संबंधी बदलावों का असर विमान ईंधन की मांग पर पड़ा।
हालांकि गर्मियों के दौरान यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी बनी रही, लेकिन ईंधन उपयोग में अपेक्षित तेजी देखने को नहीं मिली।
ऊर्जा बाजार पर नजर
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून, कृषि सीजन और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भारत की ईंधन खपत को प्रभावित करेंगी। यदि आर्थिक गतिविधियां तेज रहती हैं तो पेट्रोल और डीजल की मांग में और बढ़ोतरी संभव है।
वहीं LPG के मामले में सरकारी योजनाएं, सब्सिडी और उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सरकार और तेल कंपनियां घरेलू गैस उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
देश की बढ़ती आबादी, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के बीच ईंधन खपत के ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता व्यवहार की बदलती तस्वीर को भी दर्शाते हैं।
Reference The Hindu