नई दिल्ली:
देश की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार अब देशभर के लगभग 1,200 मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और फिश लैंडिंग सेंटरों को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। यह पहल गृह मंत्रालय की व्यापक तटीय सुरक्षा योजना का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य समुद्री सीमाओं पर निगरानी बढ़ाना और संभावित सुरक्षा खतरों को समय रहते रोकना है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार पहले ही देश के लगभग 250 समुद्री बंदरगाहों की सुरक्षा से जुड़े कार्य CISF को सौंप चुकी है। अब इसी अनुभव और सुरक्षा ढांचे का उपयोग करते हुए फिशिंग हार्बर और मछली उतराई केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाएगा।
तटीय इलाकों में बढ़ेगी निगरानी
भारत की लंबी समुद्री सीमा कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरती है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में छोटे-बड़े फिशिंग हार्बर मौजूद हैं, जहां रोजाना हजारों मछुआरे और नौकाएं आवाजाही करती हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे स्थानों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों, घुसपैठ या तस्करी के लिए भी किया जा सकता है। इसी कारण इन स्थानों पर मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हर फिशिंग हार्बर पर CISF के जवानों की स्थायी तैनाती संभव नहीं होगी, लेकिन बल सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक ढांचा तैयार करेगा। इसमें स्थानीय प्रशासन को दिशा-निर्देश देना, सुरक्षा मानकों को लागू करना और तकनीकी निगरानी प्रणाली विकसित करना शामिल रहेगा।
तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
नई योजना के तहत मछुआरों की पहचान और आवाजाही को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, स्मार्ट आईडी कार्ड और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल बड़े बंदरगाहों तक सीमित नहीं रह सकती। छोटे फिशिंग पॉइंट और तटीय गांव भी सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में समन्वित सुरक्षा व्यवस्था बनाना समय की मांग है।
कई राज्यों में मौजूद हैं फिशिंग सेंटर
वर्तमान में देश के 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 1,547 अधिसूचित फिश लैंडिंग सेंटर और फिशिंग हार्बर मौजूद हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, दमन एवं दीव, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इनमें से अधिकांश केंद्रों का संचालन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा किया जाता है। निर्माण के बाद इनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों के पास रहती है। हालांकि कुछ बड़े हार्बर केंद्र सरकार और पोर्ट ट्रस्ट के अधीन भी आते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की तैयारी
सरकार का मानना है कि तटीय सुरक्षा केवल एक एजेंसी के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। वर्तमान में समुद्री इलाकों में कई सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, जिनमें कोस्ट गार्ड, स्थानीय पुलिस, समुद्री सुरक्षा इकाइयां और खुफिया एजेंसियां शामिल हैं। CISF को जोड़ने से इन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री रास्तों से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है। मछुआरे अक्सर समुद्र में सबसे पहले संदिग्ध गतिविधियों को देखते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
तटीय सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा
सरकार की यह योजना केवल सुरक्षा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए पूरे तटीय क्षेत्र को अधिक संगठित बनाना भी है। आने वाले समय में यह पहल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है और तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकती है।
Reference The Hindu