नई दिल्ली
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (Installed Renewable Energy Capacity) के मामले में भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। यह उपलब्धि केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक मजबूती, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में जिस तेजी से निवेश बढ़ाया है, उसका परिणाम अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है। देश में बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, विंड एनर्जी प्रोजेक्ट और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे भारत की ऊर्जा क्षमता लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की यह प्रगति आने वाले वर्षों में विदेशी ईंधन पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खासकर पेट्रोलियम और कोयले के आयात में कमी आने से देश के आर्थिक संसाधनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में भी यह कदम मददगार साबित होगा।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की हरित ऊर्जा यात्रा की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरणों और तकनीकों का घरेलू उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ा पाता है। वर्तमान में सोलर सेल, वेफर और पॉलीसिलिकॉन जैसे कई महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए भारत काफी हद तक विदेशी बाजारों पर निर्भर है। यदि इन क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन को मजबूत किया जाता है, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक मजबूत आपूर्ति केंद्र के रूप में उभर सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाएं, जैसे राष्ट्रीय सौर मिशन, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं (PLI Scheme), इस बदलाव को गति दे रही हैं। इसके अलावा राज्यों में भी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी दी जा रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था स्थापित होने से लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल रही है। वहीं किसानों के लिए सोलर पंप और छोटे ऊर्जा संयंत्र आय का नया स्रोत बन रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
पर्यावरण के नजरिए से देखें तो भारत की यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता बढ़ रही है और ऐसे समय में भारत का स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संदेश देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यही गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत ग्रीन एनर्जी सेक्टर में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।
सरकार ने वर्ष 2030 तक बड़े स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नई परियोजनाओं के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और स्मार्ट ग्रिड जैसी तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित उद्योगों के विस्तार के साथ नवीकरणीय ऊर्जा की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है।
भारत की यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं बल्कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में देश की मजबूत तैयारी का संकेत है। यदि घरेलू उत्पादन, तकनीकी विकास और निवेश की रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नई ताकत के रूप में उभर सकता है।
Reference Akashvani