पुणे: हवाई यात्रा को आसान और आधुनिक बनाने की दिशा में पुणे एयरपोर्ट ने एक दिलचस्प प्रयोग शुरू किया है। यहां अब यात्रियों की सहायता के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोबोट का ट्रायल चल रहा है। यह रोबोट सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों के लिए कई छोटे-बड़े काम भी कर रहा है — जैसे रास्ता बताना, टैक्सी बुक कराने में मदद, खाने-पीने की जगह सुझाना और फ्लाइट से जुड़ी जानकारी देना।
कैसे काम करता है यह रोबोट
एयरपोर्ट पर पहुंचते ही यात्रियों का सामना अब एक चलते-फिरते डिजिटल सहायक से होता है। यह रोबोट इंसान की तरह खड़ा होकर यात्रियों से बात करता है और उनके सवाल समझकर जवाब देता है।
. किसी यात्री को बोर्डिंग गेट ढूंढना हो
. किसी को चेक-इन काउंटर का पता चाहिए
. या किसी को टर्मिनल के अंदर रेस्टोरेंट या वॉशरूम का रास्ता
रोबोट तुरंत दिशा बताता है। इतना ही नहीं, यदि यात्री चाहे तो यह कैब बुकिंग की प्रक्रिया में भी मार्गदर्शन देता है और शहर में खाने-पीने की जगहों की जानकारी भी सुझाता है।
भाषा की समस्या भी खत्म
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोबोट को कई भाषाओं में बातचीत के लिए तैयार किया गया है। यह हिंदी, अंग्रेज़ी और मराठी जैसी भाषाओं में लोगों से बात कर सकता है।
इससे खासतौर पर बुजुर्ग यात्रियों और पहली बार उड़ान भरने वालों को काफी राहत मिल रही है, क्योंकि वे सीधे मशीन से अपनी भाषा में पूछ सकते हैं — “मेरा गेट कहाँ है?” या “चेक-इन काउंटर किस तरफ है?”
तकनीक के पीछे क्या है खास
यह रोबोट सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित नहीं है। इसमें लगे सेंसर और कैमरे आसपास की गतिविधियों को पहचान सकते हैं।
. भीड़भाड़ वाले इलाके की पहचान
. रास्ता रोकने वाली बाधाओं से बचना
. यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक मार्गदर्शन देना
हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि यह सुरक्षा कर्मियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि केवल सहायक की भूमिका निभाएगा। सुरक्षा जांच और निगरानी का काम पहले की तरह मानव कर्मियों द्वारा ही किया जाएगा।
यात्रियों को क्या फायदा
इस प्रयोग का सबसे बड़ा उद्देश्य एयरपोर्ट पर यात्रियों की उलझन कम करना है। अक्सर देखा जाता है कि लोग एयरपोर्ट पर पहुंचकर गेट, काउंटर या सुविधाएं खोजते-खोजते परेशान हो जाते हैं। अब वे सीधे रोबोट से पूछ सकते हैं।
. कई यात्रियों ने ट्रायल के दौरान सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
. पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों को आत्मविश्वास मिला
. बुजुर्गों को लाइन में खड़े होकर पूछताछ नहीं करनी पड़ी
. विदेशी यात्रियों को भी मदद मिल रही है
भविष्य की योजना
अभी यह सेवा परीक्षण चरण में है और कुछ दिनों तक इसकी कार्यक्षमता को परखा जाएगा। यदि परिणाम अच्छे रहे तो एयरपोर्ट प्रशासन इसे स्थायी सेवा के रूप में लागू कर सकता है। आगे चलकर ऐसे रोबोट यात्रियों को सामान से जुड़ी जानकारी, बोर्डिंग अपडेट और आपातकालीन संदेश भी दे सकते हैं।
बदलती हवाई यात्रा की तस्वीर
भारत के एयरपोर्ट तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। पहले जहां पूछताछ काउंटर ही एकमात्र सहारा होते थे, अब तकनीक यात्रियों का निजी सहायक बनती जा रही है। पुणे एयरपोर्ट का यह कदम इसी बदलाव की ओर संकेत देता है — एक ऐसा भविष्य, जहां यात्रा केवल तेज नहीं बल्कि आसान और तनाव-मुक्त भी होगी।
AI रोबोट की शुरुआत केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य एयरपोर्ट पर भी ऐसे स्मार्ट सहायक देखने को मिल सकते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो अब एयरपोर्ट पर “किसी से पूछना” जरूरी नहीं — आपका जवाब देने के लिए एक डिजिटल साथी हमेशा तैयार रहेगा।

















