नई दिल्ली: अगर आप ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुक करते समय जल्दीबाज़ी में बार-बार लॉगिन करते हैं या किसी शॉर्टकट/ऑटो-फिल सॉफ्टवेयर का सहारा लेते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम में नई तकनीकी निगरानी लागू कर दी है। इसका मकसद दलालों और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाकर आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ाना है।
क्यों बदला नियम?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि टिकट खुलते ही कुछ ही सेकंड में सीटें भर जाती हैं। जांच में सामने आया कि कई लोग ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर और स्क्रिप्ट के जरिए बहुत तेज़ी से टिकट बुक कर लेते थे। इससे आम यात्री पीछे रह जाते थे।
अब सिस्टम उपयोगकर्ता की गतिविधियों को पहचान सकेगा — यानी टिकट इंसान बुक कर रहा है या कोई सॉफ्टवेयर। इसी के आधार पर कार्रवाई भी होगी।
आधे घंटे में 5 बार से ज्यादा लॉगिन? तुरंत कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई यूज़र एक ही आईडी से 30 मिनट के भीतर पांच बार से ज्यादा लॉगिन या लॉगआउट करता है, तो उसका अकाउंट संदिग्ध माना जाएगा। ऐसे मामलों में:
अकाउंट 24 घंटे के लिए ब्लॉक किया जा सकता है
बार-बार नियम तोड़ने पर लंबी अवधि का प्रतिबंध भी लग सकता है
रेलवे का कहना है कि सामान्य यात्री को टिकट बुक करने में इतनी बार लॉगिन करने की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए यह कदम दलाल गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है।
IP एड्रेस और मोबाइल नंबर पर भी नजर
अब केवल आईडी ही नहीं, बल्कि:
IP एड्रेस (आप किस नेटवर्क से लॉगिन कर रहे हैं)
मोबाइल नंबर
दोनों का मिलान भी किया जाएगा।
अगर दोनों अलग-अलग लोकेशन या संदिग्ध पैटर्न दिखाते हैं, तो बुकिंग बीच में ही रुक सकती है।
तेज टाइपिंग भी बन सकती है शक की वजह
रेलवे ने एक और दिलचस्प नियम लागू किया है। टिकट बुक करते समय यात्री का नाम, उम्र, लिंग आदि भरने में अगर असामान्य रूप से बहुत कम समय लगता है (यानी इंसान के मुकाबले सॉफ्टवेयर जैसा), तो सिस्टम उसे ऑटोमेशन मान सकता है।
ऐसी स्थिति में:
. ट्रांजैक्शन तुरंत रोक दिया जाएगा
. आईडी जांच के दायरे में आ जाएगी
क्या फायदा होगा आम यात्रियों को?
रेलवे का दावा है कि नई तकनीक लागू होने से आम लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। अनुमान है कि:
कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना लगभग 40% तक बढ़ सकती है
दलालों द्वारा टिकट ब्लॉक करने की समस्या कम होगी
तत्काल टिकट बुकिंग अधिक पारदर्शी होगी
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
टिकट बुक करते समय केवल आधिकारिक वेबसाइट/ऐप का उपयोग करें
. किसी ऑटो-फिल टूल या एजेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल न करें
. बार-बार लॉगिन-लॉगआउट से बचें
. सही जानकारी धीरे-धीरे और खुद भरें
रेलवे का संदेश
रेलवे अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह कदम यात्रियों को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें राहत देने के लिए है। उद्देश्य है कि टिकट “पहले आओ-पहले पाओ” के नियम के अनुसार सही व्यक्ति तक पहुंचे, न कि तकनीक का गलत फायदा उठाने वालों तक।
नई व्यवस्था से साफ संकेत है — अब स्मार्ट ट्रिक्स नहीं, बल्कि सही तरीके से टिकट बुक करने वालों को ही सीट मिलेगी।

















