चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं और नकद बांटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकारों को दी कड़ी सलाह

नई दिल्ली। चुनावी मौसम में वोटरों को आकर्षित करने के लिए घोषित की जाने वाली मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) और सीधे नकद वितरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के ऐलान लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक अनुशासन दोनों के लिए उचित नहीं माने जा सकते।

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकारों को जनता को मुफ्त सुविधाएं देने के बजाय रोजगार के अवसर तैयार करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। न्यायालय का कहना है कि जब लोगों के पास काम और स्थायी आय होगी तो वे अपनी जरूरतें स्वयं पूरी कर पाएंगे और आत्मसम्मान भी बना रहेगा।

 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बिजली बिल माफी या मुफ्त सेवाएं देने से वास्तविक विकास संभव नहीं है। सरकारों को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में निवेश करना चाहिए ताकि स्थायी आर्थिक प्रगति हो सके। न्यायालय ने पूछा कि यदि सब कुछ मुफ्त दिया जाएगा तो काम करने की प्रेरणा कैसे बनेगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा बताया और कहा कि चुनाव से पहले ऐसे वादे वित्तीय बोझ बढ़ाते हैं तथा दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से भी इस मामले पर जवाब मांगा है।

 

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि राज्यों को अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सड़क, सिंचाई, बिजली, उद्योग और कौशल विकास जैसी योजनाएं जनता को अधिक लाभ देंगी।

See also  सुनेत्रा पवार: reluctant नेता जो आगे बढ़ा सकती हैं अजित पवार की राजनीतिक विरासत

 

अदालत ने संकेत दिया कि ऐसी घोषणाओं को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की आवश्यकता है ताकि चुनावी लाभ के लिए सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखा जा सके।

 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि भविष्य में चुनाव से पहले घोषित होने वाली मुफ्त योजनाओं पर कड़ी निगरानी हो सकती है और सरकारों को रोजगार तथा विकास आधारित मॉडल अपनाने की सलाह दी गई है।

Related Posts

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं…

Read more

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर परिसीमन (Delimitation) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया बयान ने इस…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

बिहार में शुरू हुई स्व-जनगणना, 2 मई से घर-घर जाकर होगी गणना

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

पटना में ई-वाहनों के लिए बड़ी पहल, 58 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन की तैयारी

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

रोमांचक मुकाबले में गुजरात की जीत, गिल बने हीरो

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

बिहार में बढ़ती इंटरनेट लत: युवाओं के भविष्य पर सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका: बहुमत के बावजूद नहीं मिल पाया जरूरी समर्थन

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत

लोकसभा परिसीमन पर सियासी हलचल: क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? दक्षिण भारत की सीटों में बढ़ोतरी के संकेत