3 घंटे की डेडलाइन! डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नया कानून लागू

भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब फेसबुक-इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को विवादित या गैर-कानूनी सामग्री हटाने के लिए लंबा इंतज़ार नहीं मिलेगा। पहले जहां कार्रवाई के लिए लगभग डेढ़ दिन तक का समय मिल जाता था, वहीं अब सिर्फ 3 घंटे के भीतर कदम उठाना अनिवार्य होगा। इस फैसले से डिजिटल दुनिया में जवाबदेही और तेज़ी दोनों बढ़ने वाली हैं।

 

क्या बदला नए नियमों में?

.  नई व्यवस्था के तहत सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन कर प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी साफ कर दी है।

.  शिकायत मिलने के बाद आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए तीन घंटे की समय सीमा तय

.  गैर-कानूनी पोस्ट, अफवाह, भ्रामक सूचना और हानिकारक सामग्री पर तुरंत कार्रवाई जरूरी

.  समय पर कार्रवाई न करने पर प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) पर खतरा

सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सूचना का बड़ा माध्यम बन चुके हैं, इसलिए तेजी से फैलती गलत जानकारी को रोकना बेहद आवश्यक है।

 

  AI कंटेंट पर भी नई नीति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार फोटो-वीडियो और टेक्स्ट को लेकर भी नियम बदले गए हैं।

पहले प्रस्ताव था कि AI से बनी सामग्री पर अलग से स्पष्ट लेबल दिखाना पड़ेगा, लेकिन कंपनियों की आपत्तियों के बाद इसे कुछ नरम किया गया है। अब प्लेटफॉर्म्स को प्रमुख रूप से उपयोगकर्ताओं को जानकारी देना होगा, पर कठोर लेबलिंग अनिवार्य नहीं रहेगी।

 

कंपनियों की चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला प्लेटफॉर्म्स के लिए आसान नहीं होगा।

.  बहुत कम समय में जांच और निर्णय लेना मुश्किल

See also  सरकारी कंपनियों की कमाई में उछाल, निवेशकों के लिए बढ़े अवसर

.  गलत कार्रवाई होने पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर की आशंका

.  मॉडरेशन टीम और टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ेगा

.  यदि प्लेटफॉर्म तय समय में कार्रवाई नहीं करते, तो उन्हें यूज़र द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी भी उठानी पड़ सकती है।

 

आम यूज़र्स पर क्या असर?

इस नियम का सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ेगा:

.  फेक न्यूज और अफवाहें जल्दी हटेंगी

.  निजी तस्वीरों या गलत उपयोग पर जल्दी राहत मिलेगी

.  शिकायत दर्ज करने के बाद लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा

 

सरकार का नया कदम डिजिटल दुनिया में अनुशासन लाने की कोशिश माना जा रहा है। जहां इससे इंटरनेट अधिक सुरक्षित हो सकता है, वहीं कंपनियों के सामने तकनीकी और कानूनी चुनौतियां भी बढ़ेंगी। आने वाले समय में यह तय करेगा कि ऑनलाइन अभिव्यक्ति और जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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