रुपये में बड़ी गिरावट: डॉलर के मुकाबले 92.30 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रुपया

नई दिल्ली:

भारतीय मुद्रा रुपया एक बार फिर दबाव में नजर आया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर बंद हुआ। कारोबारी दिन के अंत में रुपया लगभग 92.30 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो कि अब तक का नया रिकॉर्ड लो माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

 

दिनभर दबाव में रहा रुपया

विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार के दौरान रुपया और भी नीचे फिसलकर लगभग 92.45 प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि दिन के अंत में थोड़ी रिकवरी हुई, लेकिन इसके बावजूद यह पिछले बंद स्तर से करीब 35 पैसे कमजोर रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर बढ़े तनाव और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है।

 

कच्चे तेल की कीमतों का असर

विश्लेषकों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से भारत जैसे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और रुपया कमजोर होने लगता है।

 

विदेशी निवेश और बाजार का रुख

बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के कारण भी रुपया दबाव में रहा। इसी बीच शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई और सेंसेक्स करीब 300 अंक गिरकर बंद हुआ। निवेशकों में बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनाव को लेकर चिंता देखी जा रही है।

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आरबीआई ने किया हस्तक्षेप

रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया। बाजार सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की, जिससे गिरावट कुछ हद तक थम गई।

इसके अलावा कुछ सरकारी संस्थानों की ओर से भी डॉलर की आपूर्ति बढ़ाई गई, जिससे बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद मिली।

 

महंगाई पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया लगातार कमजोर रहता है तो इसका असर पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे देश में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

 

आगे क्या हो सकता है

आने वाले समय में विदेशी मुद्रा बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों, तेल की कीमतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रहती है तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।

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