विष्णुपद मंदिर में राष्ट्रपति ने सात पीढ़ियों के पितरों को अर्पित किए पिंड

गयापाल पुरोहितों ने सनातनी रीति से कराया कर्मकांड, फल्गु नदी में प्रवाहित किया गया पिंड।

न्यूज़ डेस्क पटना : गया (बिहार)। मोक्ष और ज्ञान की पावन भूमि गयाजी में शनिवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विष्णुपद मंदिर में पिंडदान किया। परंपरागत सनातनी विधि से संपन्न इस अनुष्ठान में राष्ट्रपति ने अपने सात पीढ़ियों के दिवंगत परिजनों — माता-पिता, सास-ससुर और दो पुत्रों सहित — के मोक्ष और आत्मा की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक पिंड अर्पित किए।

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विष्णुपद मंदिर में विधिवत अनुष्ठान

गयापाल पुरोहित राजेश कटियार और बाबूलाल झंकर ने पूरे विधि-विधान से यह कर्मकांड संपन्न कराया। राष्ट्रपति ने सर्वप्रथम अपने कुल के दिवंगत परिजनों का आह्वान किया और श्रीहरि विष्णु के चरणों में पिंड अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने गौदान की परंपरा निभाई और अक्षयवट वृक्ष के नीचे भी पिंड समर्पित किया।

फल्गु नदी में पिंड विसर्जन

कर्मकांड के अंतिम चरण में पिंड और पूजा सामग्री फल्गु नदी में प्रवाहित किए गए। माना जाता है कि गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

गयाजी की महिमा और महत्व

गया का पितृपक्ष मेला और यहां होने वाला पिंडदान देश-विदेश में प्रसिद्ध है। विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट वृक्ष आस्था के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। राष्ट्रपति का यहां आकर अनुष्ठान करना इस परंपरा की महत्ता को और मजबूत करता है।

स्वागत और सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विशेष विमान से गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं। जहां केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राष्ट्रपति सीधे विष्णुपद मंदिर पहुंचीं और करीब दो घंटे तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।

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राष्ट्रपति का भावनात्मक जुड़ाव

राष्ट्रपति का मूल निवास ओडिशा के मयूरगंज जिले का पहाड़पुर गांव है। परंपरागत आस्था और सनातनी संस्कारों से गहरा जुड़ाव रखते हुए उन्होंने गयाजी आकर पूर्वजों के मोक्ष की कामना की।

Ayush Mishra

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