पटना। राजधानी में बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना अब जमीन पर नजर आने लगी है। शहर के पूर्वी हिस्से में बन रहे प्राथमिक कॉरिडोर पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और अधिकारियों का कहना है कि बहुत जल्द लोग पहली बार आईएसबीटी से मलाही पकड़ी के बीच मेट्रो को चलते देख सकेंगे। लंबे इंतजार के बाद यह परियोजना अब ऐसे चरण में पहुंच गई है जहां निर्माण के साथ-साथ ट्रायल की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।
कॉरिडोर का काम लगभग अंतिम चरण में
इंजीनियरों के अनुसार, प्राथमिक कॉरिडोर पर कई हिस्सों में सिविल स्ट्रक्चर का काम पूरा कर लिया गया है। पिलर, गर्डर और एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण लगभग खत्म हो चुका है। अब स्टेशन भवनों की फिनिशिंग, प्लेटफॉर्म, लिफ्ट-एस्केलेटर और विद्युत उपकरण लगाने पर फोकस किया जा रहा है।
मलाही पकड़ी से खेमनीचक और आगे के स्टेशनों के बीच ट्रैक बिछाने का काम भी तेजी से चल रहा है, ताकि ट्रेन परीक्षण में कोई बाधा न आए।
स्टेशन दूरी और संरचना
इस खंड में स्टेशन एक-दूसरे से लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बनाए गए हैं।
मलाही पकड़ी से अगले स्टेशन तक करीब 1516 मीटर
आगे के दो स्टेशनों के बीच लगभग 1016 मीटर
अगले हिस्से में करीब 1437 मीटर की दूरी तय करेगी मेट्रो
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी दूरी शहरी आवागमन के लिए आदर्श मानी जाती है, जिससे यात्रियों को पैदल पहुंचने में सुविधा होगी और ट्रेन की औसत गति भी बेहतर रहेगी।
इस साल मीठापुर तक ट्रायल का लक्ष्य
परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिया है कि लगभग 3.2 किलोमीटर हिस्से में इसी वर्ष परीक्षण दौड़ शुरू करने की योजना है। इसके लिए बिजली आपूर्ति, सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय किया जा रहा है।
स्टेशन परिसर में एस्केलेटर और लिफ्ट लगाने का काम पूरा हो चुका है। सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ट्रैक पर ट्रेन उतारी जाएगी। प्रारंभिक ट्रायल के दौरान ट्रेन कम गति से चलाई जाएगी और हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच होगी।
2025 तक संचालन की उम्मीद
अधिकारियों का अनुमान है कि परीक्षण सफल रहने पर 2025 तक इस हिस्से में यात्री सेवाएं शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। शुरुआत में सीमित स्टेशनों के बीच संचालन होगा, जिसे धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा।
रेल सुरक्षा आयुक्त द्वारा निरीक्षण के बाद ही आम यात्रियों के लिए सेवा चालू की जाएगी। इसके लिए कई स्तरों पर सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी परीक्षण जरूरी हैं।
शहरवासियों की उम्मीदें
स्थानीय लोगों में इस परियोजना को लेकर खासा उत्साह है। रोजाना जाम से जूझने वाले कामकाजी लोग मानते हैं कि मेट्रो शुरू होने से समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
मलाही पकड़ी के एक दुकानदार ने बताया,
“अगर मेट्रो चलने लगी तो पटना में सफर करना आसान हो जाएगा। अभी आधे घंटे का रास्ता तय करने में डेढ़ घंटा लग जाता है।”
ट्रैफिक जाम से राहत की उम्मीद
पटना की सड़कों पर बढ़ती भीड़ लंबे समय से बड़ी समस्या रही है। स्कूल, ऑफिस और अस्पताल जाने वाले लोगों को रोज घंटों जाम में फंसना पड़ता है। मेट्रो चालू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाएंगे, जिससे सड़कों पर दबाव कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो केवल यात्रा का साधन नहीं बल्कि शहर के विकास की धुरी बनती है — इसके आसपास नए बाजार, आवासीय परियोजनाएं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
आगे की योजना
मेट्रो प्रशासन अगले चरणों में अन्य स्टेशनों के निर्माण, पार्किंग सुविधा और फीडर बस सेवा शुरू करने की भी योजना बना रहा है। उद्देश्य यह है कि लोग घर से स्टेशन तक और स्टेशन से गंतव्य तक बिना परेशानी पहुंच सकें।
कुल मिलाकर, पटना मेट्रो अब कागजों से निकलकर हकीकत बनने के करीब है। यदि तय समयसीमा पर काम पूरा हुआ, तो बहुत जल्द राजधानी के लोग आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन का अनुभव कर पाएंगे — और शहर की रफ्तार सचमुच बदल जाएगी।


















