नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह जल्द भारत दौरे पर, द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की तैयारी

नई दिल्ली/काठमांडू: दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम सामने आया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने की तैयारी में हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय संवाद तंत्र की बैठकों के बाद होने जा रहा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि भारत-नेपाल संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

 

निमंत्रण स्वीकार, तारीख तय होना बाकी

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शाह ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। हालांकि, इस दौरे की सटीक तारीख अभी तय नहीं की गई है। दोनों देशों के बीच मौजूद आधिकारिक तंत्र के माध्यम से समय और कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

 

वैश्विक परिस्थितियों का असर नेपाल पर

नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों से आने वाली धनराशि (रेमिटेंस) देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।

विदेश मंत्री के अनुसार, युद्ध के कारण तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने नेपाल की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। साथ ही खाद और कृषि से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं, क्योंकि धान की बुवाई का मौसम नजदीक है।

 

भारत-नेपाल संबंधों पर रहेगा फोकस

इस संभावित दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। नेपाल सरकार का मानना है कि भारत के साथ संबंधों को व्यवस्थित और मजबूत बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

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दोनों देशों के बीच पहले से लगभग 40 विभिन्न सहयोगी तंत्र मौजूद हैं, जिनके जरिए तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहती है।

 

क्षेत्रीय शांति और सहयोग की उम्मीद

नेपाल ने दक्षिण एशिया में शांति प्रयासों का भी समर्थन किया है। पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए नेपाल ने उम्मीद जताई है कि यह शांति लंबे समय तक कायम रहेगी।

नेपाल का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता से न केवल राजनीतिक माहौल बेहतर होगा बल्कि आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

 

नई सरकार की प्राथमिकताएं

नेपाल की नई सरकार ने साफ किया है कि उसकी विदेश नीति में निरंतरता बनी रहेगी। देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और संतुलित कूटनीति उसके प्रमुख आधार होंगे।

सरकार आर्थिक विकास को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता मान रही है और इसी दिशा में पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रही है।

 

आंतरिक राजनीति और सुधार का वादा

देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर भी सरकार का ध्यान है। भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर सख्ती बरतने का आश्वासन दिया गया है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह बदले की राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच और कानून के शासन को प्राथमिकता देगी।

 

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री शाह का भारत दौरा भारत-नेपाल संबंधों के लिए एक नया अध्याय खोल सकता है। इससे न केवल व्यापार और कूटनीति को मजबूती मिलेगी, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी और गहरे होंगे।

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