
पटना
पटना के जयप्रभा मेदांता अस्पताल को लेकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक अहम चर्चा सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अस्पताल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को इलाज में प्राथमिकता देने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल के कुल बिस्तरों में से लगभग 25 प्रतिशत बेड गरीब और रेफर होकर आने वाले मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।
सरकार के अनुसार, बिहार के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से जिन मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज की आवश्यकता होती है, उन्हें यहाँ भेजा जा रहा है। खासकर गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर (ऑन्कोलॉजी) और हृदय शल्य चिकित्सा (कार्डियक सर्जरी) के मरीजों का उपचार इसी व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।
आयुष्मान योजना से भी मिल रहा सहारा
मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारकों को भी इस अस्पताल में इलाज की सुविधा दी जा रही है। गरीब मरीजों का खर्च योजना के माध्यम से कवर किया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी इलाज में बाधा न बने। कई मरीजों का उपचार पहले ही इस व्यवस्था के जरिए किया जा चुका है।
विधान परिषद में यह मामला सदस्य संजय सिंह के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद उठा। उन्होंने सवाल किया कि जब अस्पताल को रियायती शर्तों पर जमीन दी गई थी, तो क्या गरीबों को अपेक्षित स्तर पर इलाज मिल रहा है? इस पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि रेफरल सिस्टम के माध्यम से मरीजों को लगातार सुविधा मिल रही है और व्यवस्था की निगरानी भी की जा रही है।
विपक्ष की नाराज़गी भी सामने आई
सरकारी जवाब से कुछ सदस्यों ने असंतोष जताया। उनका कहना था कि गरीब मरीजों को वास्तविक लाभ कितना मिल रहा है, इसकी पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। बहस के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि लोगों को निजी संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।
फार्मेसी संस्थानों पर भी उठा सवाल
चर्चा के दौरान एक और विषय प्रमुखता से सामने आया। बताया गया कि पिछले तीन वर्षों से राज्य के लगभग 140 फार्मेसी संस्थानों को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिल पाया है। इसके कारण कई छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। सदस्यों ने सरकार से इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की, ताकि बिहार के विद्यार्थियों को बाहर न जाना पड़े।
मानवीय पहलू
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर बीमारियों के इलाज में समय सबसे अहम होता है। अगर रेफरल प्रणाली सही ढंग से काम करे और गरीब मरीजों को समय पर बेड तथा उपचार मिले, तो कई परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से बच सकते हैं। कई मरीजों के परिजनों ने भी उम्मीद जताई कि यह व्यवस्था ज़मीन पर पूरी तरह लागू हो और जरूरतमंद लोगों तक बिना भेदभाव के पहुंचे।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि गरीबों के उपचार में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी और अस्पतालों की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इससे यह उम्मीद बनी है कि आने वाले समय में राज्य के गंभीर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं यहीं उपलब्ध हो सकेंगी।





