मखाना उद्योग को राष्ट्रीय पहचान: नवाचार के लिए मिला ‘गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड’

पटना,:

बिहार के मखाना उद्योग को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के कृषि विभाग के अंतर्गत उद्यान निदेशालय को मखाना वैल्यू चेन में किए गए अभिनव प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित ‘गोल्डन पीकॉक इनोवेटिव प्रोडक्ट/सर्विस अवॉर्ड 2026’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार देश-विदेश में नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों के लिए जाना जाता है, जिसे इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर्स (IoD) द्वारा प्रदान किया जाता है।

इस सम्मान के लिए चयन एक उच्चस्तरीय जूरी द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने की। यह उपलब्धि न केवल विभाग के लिए बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बन गई है। पुरस्कार के अंतर्गत ट्रॉफी और प्रमाण पत्र जल्द ही नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रदान किए जाएंगे।

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उद्यान निदेशालय के निदेशक निखिल कुमार और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान राज्य के किसानों, वैज्ञानिकों और सभी संबंधित हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मंत्री ने यह भी बताया कि बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा देता है, जिससे यह राज्य की पहचान बन चुका है।

पिछले कुछ वर्षों में उद्यान निदेशालय ने मखाना उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया गया है। इसके चलते किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है और उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

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मखाना अब केवल एक पारंपरिक फसल नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की आर्थिक ताकत और पहचान बनकर उभर रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे राज्य के किसानों को नए अवसर मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान से न केवल राज्य के कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि अन्य राज्यों को भी नवाचार की दिशा में काम करने की प्रेरणा मिलेगी। आने वाले समय में मखाना उद्योग के और अधिक विस्तार और वैश्विक पहचान की उम्मीद जताई जा रही है।

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