भागलपुर की गंगा में मछलियों की घटती संख्या पर चिंता, सिर्फ 14 उच्च प्रजातियां बचीं

भागलपुर (बिहार)

गंगा नदी की जैव विविधता को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात उजागर हुई है कि भागलपुर क्षेत्र की गंगा में अब केवल 14 उच्च श्रेणी की मछलियां ही शेष रह गई हैं। यह रिपोर्ट विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा गंगा भ्रमण के दौरान तैयार की गई है, जिसने नदी के बदलते पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

क्या कहती है रिपोर्ट?

अध्ययन के अनुसार, गंगा नदी में पहले जहां मछलियों की कई महत्वपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियां पाई जाती थीं, वहीं अब उनकी संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव न केवल मछलियों के लिए, बल्कि पूरे जल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे का संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ना, और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव इस गिरावट के मुख्य कारण हैं।

 

जलीय जीवन पर संकट

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केवल मछलियां ही नहीं, बल्कि गंगा में रहने वाले अन्य जीव-जंतु और पक्षियों की संख्या भी प्रभावित हो रही है। यह स्थिति आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है, यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

 

114 प्रजातियों का अध्ययन

टीम ने अपने अध्ययन में कुल 114 प्रकार के जलीय जीवों और मछलियों का विश्लेषण किया। इसके साथ ही 31 तरह के पक्षियों को भी गंगा किनारे देखा गया। लेकिन इनमें से उच्च गुणवत्ता वाली मछलियों की संख्या बेहद कम पाई गई, जो चिंता का विषय है।

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मछलियों की ‘शौकीन’ होती प्रजातियां

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ मछलियां अत्यधिक संवेदनशील होती हैं और साफ पानी में ही जीवित रह पाती हैं। जैसे-जैसे नदी का पानी प्रदूषित होता जा रहा है, वैसे-वैसे ये प्रजातियां तेजी से खत्म हो रही हैं।

 

स्थानीय लोगों की चिंता

गंगा किनारे रहने वाले मछुआरों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां उन्हें आसानी से विभिन्न प्रकार की मछलियां मिल जाती थीं, अब उन्हें काफी मेहनत के बाद भी सीमित प्रजातियां ही मिल पा रही हैं। इससे उनकी आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।

 

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा को बचाने के लिए जरूरी है कि:

नदी में प्रदूषण को सख्ती से नियंत्रित किया जाए

अवैध मछली पकड़ने पर रोक लगे

जल प्रवाह को प्राकृतिक रूप से बनाए रखा जाए

जागरूकता अभियान चलाए जाएं

 

भागलपुर की गंगा में मछलियों की घटती संख्या एक गंभीर पर्यावरणीय संकेत है। यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि यदि हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंगा की समृद्ध जैव विविधता केवल किताबों में ही देखने को मिलेगी।

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