गणेशोत्सव 2025: महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में बप्पा के जयकारे

न्यूज़ डेस्क पटना :  महाराष्ट्र में बुधवार से शुरू हुआ 10 दिवसीय गणेशोत्सव पूरे देश में उत्साह और भक्ति का माहौल लेकर आया है। सुबह से ही गलियों और मंदिरों में “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया” के जयकारों की गूंज सुनाई दी। लोग भगवान गणेश को अपने घरों और पंडालों में बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ विराजित कर रहे हैं।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की शुभकामनाएं

नरेन्द्र मोदी ने दी शुभकामनायें
नरेन्द्र मोदी ने दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति मुर्मू नें दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति मुर्मू नें दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए प्रार्थना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को इस पावन अवसर की बधाई दी। उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की कि सभी बाधाएं दूर हों और देशवासी एक सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दें।

देशभर में उत्सव का रंग

देश के विभिन्न स्थानों से आई तस्वीर (file photo social media)
देश के विभिन्न स्थानों से आई तस्वीर (file photo social media)
देश के विभिन्न स्थानों से आई तस्वीर (file photo social media)
देश के विभिन्न स्थानों से आई तस्वीर (file photo social media)

 

 

 

 

 

 

 

 

गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी या विनायक चविथी भी कहा जाता है। इसे नई शुरुआत और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा का प्रतीक माना जाता है।
मुंबई से लेकर दिल्ली, पुणे से लेकर कोलकाता तक लोग घरों और पंडालों में गणपति की मूर्तियां ला रहे हैं। भक्त उपवास रखते हैं, स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं और मंडपों को सजाकर भक्ति गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

लालबागचा राजा का आकर्षण

सामने आई लालबागचा राजा की पहली झलक ( file photo social media)
सामने आई लालबागचा राजा की पहली झलक ( file photo social media)

मुंबई के लालबागचा राजा का पहला दर्शन इस बार रविवार को हुआ। यह प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और मुंबई की जीवंतता का प्रतीक मानी जाती है।
1934 से स्थापित इस गणेश प्रतिमा का आयोजन पुतलाबाई चॉल के सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा किया जाता है। पिछले आठ दशकों से कांबली परिवार इस मूर्ति की देखरेख कर रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

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परंपरा और पहचान

महाराष्ट्र सरकार ने इस साल सार्वजनिक गणेशोत्सव को आधिकारिक रूप से ‘महाराष्ट्र राज्य उत्सव’ घोषित किया है। इसकी नींव 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने रखी थी, जिन्होंने गणेशोत्सव को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनाया।

Ayush Mishra

journalist

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