नई दिल्ली
वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग और चीन द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के बीच भारत और अमेरिका ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर एक बड़ा सहयोगी ढांचा तैयार किया है। यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर की तकनीकी और औद्योगिक कंपनियां महत्वपूर्ण खनिजों की कमी से जूझ रही हैं।
नई दिल्ली में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दोनों देशों ने इस साझेदारी को अंतिम रूप दिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना, सप्लाई चेन को मजबूत बनाना और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए संसाधनों को सुरक्षित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों, मोबाइल फोन, बैटरी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की भूमिका और बढ़ने वाली है। ऐसे में भारत और अमेरिका का यह कदम वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
समझौते के तहत दोनों देश खनन, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और निवेश के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा रेयर अर्थ स्क्रैप के बेहतर प्रबंधन और नई तकनीकों के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस साझेदारी का उद्देश्य केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करना भी है।
सूत्रों के अनुसार, यह सहयोग पिछले कुछ महीनों से चर्चा में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भी महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित सप्लाई को साझा रणनीतिक प्राथमिकता बताया गया था। अब इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
केवल भारत और अमेरिका ही नहीं, बल्कि क्वाड समूह के अन्य सदस्य ऑस्ट्रेलिया और जापान भी इस पहल का हिस्सा बने हैं। चारों देशों ने मिलकर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन विकसित करने के लिए अलग ढांचा तैयार किया है। बताया जा रहा है कि इस योजना में सरकारी और निजी क्षेत्र से करीब 20 अरब डॉलर तक के निवेश को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
हाल के वर्षों में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स और अन्य रणनीतिक धातुओं के निर्यात पर नियंत्रण कड़ा किया है। इसका असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दिया। कई देशों में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा उद्योगों के सामने सप्लाई संकट की स्थिति बनने लगी। ऐसे माहौल में भारत और अमेरिका की यह नई साझेदारी दुनिया के लिए वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारत के लिए यह समझौता कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। यदि महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित होती है, तो इससे घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
अमेरिका भी चीन पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार नए साझेदार तलाश रहा है। भारत के साथ बढ़ता सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में यह साझेदारी केवल खनिजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नई तकनीकों और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी बड़ा असर डाल सकती है।
वैश्विक राजनीति और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के दौर में रेयर अर्थ मिनरल्स अब केवल संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक ताकत बन चुके हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका का यह नया कदम आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और तकनीकी दुनिया की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
Reference The Hindu