
नई दिल्ली: दुनिया भर में छात्रों के बीच मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अब गंभीर चिंता सामने आ रही है। इसी को देखते हुए आधे से ज्यादा देशों ने स्कूल परिसरों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक लगा दी है। यह कदम खास तौर पर छात्रों का ध्यान पढ़ाई की ओर केंद्रित रखने और डिजिटल खतरों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 58% देशों ने स्कूलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू किया है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण छात्रों का ध्यान भटक रहा है और पढ़ाई पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
पढ़ाई पर असर और बढ़ती ऑनलाइन समस्याएं
विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन के कारण छात्रों में एकाग्रता की कमी देखी जा रही है। पढ़ाई के दौरान नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया के आकर्षण से बच्चे जल्दी विचलित हो जाते हैं।
इसके साथ ही, ऑनलाइन धमकियों और साइबर बुलिंग के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। यही वजह है कि कई देशों ने स्कूलों में मोबाइल के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया है।
किशोरों पर सोशल मीडिया का गहरा प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया का असर किशोरों पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। खासकर किशोरियों में इसके प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
एक अध्ययन के अनुसार, करीब 32% किशोरियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के बाद अपने शरीर को लेकर अधिक नकारात्मक भावनाएं महसूस कीं। इससे आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
क्यों जरूरी है यह फैसला?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में मोबाइल पर रोक लगाने से छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर बेहतर तरीके से लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के नकारात्मक प्रभावों से भी बचाने में मददगार साबित हो सकता है।
हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि तकनीक को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय उसका सही और संतुलित उपयोग सिखाना ज्यादा जरूरी है।
दुनिया भर में स्कूलों में मोबाइल फोन पर लगाई जा रही पाबंदी इस बात का संकेत है कि शिक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम छात्रों के विकास और पढ़ाई पर कितना सकारात्मक प्रभाव डालता है।





