BAFTA में चमका मणिपुर: ‘बूंग’ ने जीता बेस्ट चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म अवॉर्ड,

मुंबई/लंदन,

भारतीय सिनेमा के लिए यह पल गर्व से भरा रहा, जब मणिपुर की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म “बूंग (Boong)” ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान हासिल किया। लंदन में आयोजित प्रतिष्ठित BAFTA (ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स) समारोह में इस फिल्म को बेस्ट चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म की श्रेणी में पुरस्कार मिला। यह उपलब्धि सिर्फ एक फिल्म की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पहचान दिलाने वाली साबित हुई।

 

दुनिया के मंच पर पहुँची मणिपुर की आवाज

रविवार रात आयोजित समारोह में जब विजेताओं के नाम घोषित किए गए तो अचानक सबका ध्यान एक छोटी-सी लेकिन दिल छू लेने वाली भारतीय फिल्म पर टिक गया। लंबे समय से संघर्ष और अशांति झेल रहे मणिपुर की कहानी को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने वाली “बूंग” ने अंतरराष्ट्रीय जूरी का दिल जीत लिया।

फिल्म के निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी ने मंच से कहा कि यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि उन बच्चों और परिवारों की कहानी है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा में जगह नहीं मिलती। उनके शब्दों में यह फिल्म उस समाज की आवाज है जो अक्सर अनदेखा और अनसुना रह जाता है।

 

भारतीय सिनेमा के लिए ऐतिहासिक पल

बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब मणिपुरी भाषा की किसी फिल्म को BAFTA में इस श्रेणी का सम्मान मिला। समारोह में मौजूद भारतीय प्रतिनिधियों और दर्शकों ने खड़े होकर तालियाँ बजाईं। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि अच्छी कहानी और सच्ची भावनाएँ भाषा या क्षेत्र की सीमाओं में नहीं बंधतीं।

फिल्म के साथ निर्माता दल और कई भारतीय फिल्म हस्तियाँ भी मौजूद थीं। सभी ने इसे भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की बड़ी जीत बताया।

 

कहानी जो दिल को छू जाए

“बूंग” बच्चों और परिवार के रिश्तों, संघर्ष और उम्मीदों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कठिन हालातों में भी मासूमियत और उम्मीद कैसे जिंदा रहती है। यही सादगी और सच्चाई अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को भी गहराई से प्रभावित कर गई।

फिल्म में स्थानीय संस्कृति, परंपराएँ और मणिपुर के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद वास्तविक तरीके से दिखाया गया है। यही कारण रहा कि जूरी ने इसे सबसे अलग और प्रभावशाली फिल्म माना।

 

क्यों खास है यह सम्मान

. उत्तर-पूर्व भारत के सिनेमा को वैश्विक पहचान मिली

. क्षेत्रीय भाषा की फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय मंच जीता

. बच्चों और परिवार पर आधारित भारतीय कहानी को दुनिया ने सराहा

. मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र की मानवीय तस्वीर सामने आई

 

समाज और सिनेमा के बीच पुल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि संदेश है कि सिनेमा समाज को जोड़ने का माध्यम बन सकता है। फिल्म ने यह दिखाया कि संघर्ष की खबरों से परे भी मणिपुर में जीवन, संस्कृति और उम्मीद मौजूद है।

 

दर्शकों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर भी इस उपलब्धि को लेकर खुशी देखी गई। लोगों ने लिखा कि छोटे बजट और साधारण कलाकारों के बावजूद कहानी की सच्चाई ने फिल्म को महान बना दिया। कई दर्शकों ने इसे “दिल से बनी फिल्म” बताया।

 

“बूंग” की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिनेमा केवल बड़े सितारों या बड़े बजट से नहीं बनता, बल्कि संवेदनशील कहानी और ईमानदार प्रस्तुति ही उसे अमर बनाती है। मणिपुर की धरती से निकली यह कहानी अब दुनिया भर के दर्शकों के दिलों तक पहुँच चुकी है — और यही किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी जीत होती है।

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