नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सम्मेलन के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन ने राजनीतिक रंग ले लिया। पुलिस ने मामले में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सहित चार पदाधिकारियों को हिरासत में लिया है। घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
क्या था पूरा मामला?
शुक्रवार को भारत मंडपम में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन चल रहा था। कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद थे। इसी दौरान कुछ युवक कार्यक्रम स्थल के अंदर पहुंचे और हाथों में पोस्टर-टी-शर्ट लेकर नारेबाजी करने लगे।
सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें रोका और बाहर ले जाकर पुलिस को सौंप दिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, इसलिए विरोध प्रदर्शन को ज्यादा देर तक जारी नहीं रहने दिया गया। इसके बाद संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
पुलिस का पक्ष
जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था और इससे कार्यक्रम की व्यवस्था प्रभावित हुई। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी देखा कि प्रदर्शनकारी पहले से योजना बनाकर कार्यक्रम स्थल में पहुंचे थे।
फिलहाल पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भाजपा ने लगाया गंभीर आरोप
सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने घटना को सुनियोजित बताया। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि खराब करने की कोशिश है।
कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया और यह आयोजन जैसे महत्वपूर्ण मंच को विवाद में घसीटने का प्रयास था।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई को “अत्यधिक” बताया। पार्टी का कहना है कि युवाओं ने अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा बना दिया।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, असहमति जताना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
AI सम्मेलन क्यों था अहम?
यह सम्मेलन भारत में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर पर केंद्रित था। इसमें तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप्स और नीति-निर्माताओं ने AI के उपयोग, रोजगार, शिक्षा और भविष्य की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने AI को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बताया, वहीं कुछ वक्ताओं ने रोजगार पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर संतुलित नीति की जरूरत पर जोर दिया।
राजनीतिक माहौल गरम
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनावी माहौल के करीब आते ही ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाते हैं, जिससे तकनीकी कार्यक्रम भी सियासी चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं।
आगे क्या?
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। हिरासत में लिए गए पदाधिकारियों से पूछताछ जारी है और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
वहीं, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर इस मामले को जनता के बीच उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
AI जैसे भविष्य के विषय पर आयोजित कार्यक्रम के बीच हुआ यह विवाद दिखाता है कि तकनीक और राजनीति आज एक-दूसरे से अलग नहीं रहे। एक ओर सरकार इसे देश की प्रतिष्ठा से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकार का सवाल बता रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक बयानबाजी—दोनों इस मामले को और चर्चा में रख सकते हैं।

















